Homeउत्तर प्रदेशयूपी की महिला कल्याण योजनाओं से रूबरू हुआ जापानी दल

यूपी की महिला कल्याण योजनाओं से रूबरू हुआ जापानी दल

रिपोर्ट – न्यूज डेस्क ,लखनऊ

यामानाशी  प्रीफेक्चर, जापान से आए महिला प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी ली।

महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की मंत्री के सरकारी आवास पर हुई शिष्टाचार भेंट के दौरान दोनों पक्षों के बीच महिला एवं बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि संकटग्रस्त बच्चों के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और महिलाओं के लिए 181 महिला हेल्पलाइन** 24 घंटे संचालित हैं।

इनके माध्यम से अब तक करीब 3.34 लाख बच्चों और 9.71 लाख महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

हिंसा से प्रभावित महिलाओं को चिकित्सा, पुलिस, कानूनी सहायता, परामर्श और अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिका जन्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। करीब 3.68 लाख गतिविधियों के जरिए 294.50 लाख महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया गया है, जबकि 4,745 कन्या जन्मोत्सव आयोजित किए जा चुके हैं।

रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के तहत अब तक 18,866 महिलाओं और बालिकाओं को करीब 659.04 करोड़ रुपये की आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता दी गई है।

महिलाओं के आर्थिक संबल के लिए निराश्रित महिला पेंशनयोजना के तहत करीब 41.42 लाख महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।

कामकाजी महिलाओं के लिए सखी निवास योजना, महिला छात्रावास, राजकीय महिला शरणालय, संरक्षण गृह और शक्ति सदन जैसी सुविधाएं भी संचालित हैं।

बच्चों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री बाल आश्रय योजना के तहत 100 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत कोविड से माता-पिता खोने वाले बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है और अब तक 10,058 बच्चे लाभान्वित हुए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) से करीब 1.09 लाख बच्चों को 2,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता मिली है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बालिका के जन्म से लेकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा तक विभिन्न चरणों में कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना से अब तक करीब 28.35 लाख बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।

बैठक में मातृ-शिशु पोषण और स्वास्थ्य योजनाओं की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों के मुताबिक अनुपूरक पुष्टाहार कार्यक्रम के तहत करीब 156 लाख लाभार्थियों को हर महीने पोषण सहायता दी जा रही है।

प्रदेश के 43 जिलों में स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित 204 THR इकाइयों के जरिए पोषण सामग्री तैयार की जा रही है। लाभार्थियों के पंजीकरण और वितरण में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम तथा ई-केवाईसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए हॉट कुक्ड मील की व्यवस्था है, जिससे करीब 35.46 लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के संसाधनों से लैस किया जा रहा है।

ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी गई। उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत करीब 10.45 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1.22 करोड़ से अधिक परिवार जुड़े हैं। बैंक सखी, विद्युत सखी और बीसी सखी जैसी पहल के जरिए महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं।

महिला दुग्ध उत्पादकों को संगठित कर पांच दुग्ध उत्पादक कंपनियां बनाई गई हैं, जिनसे 31 जिलों के हजारों गांवों की 3.88 लाख से अधिक महिला शेयरधारक जुड़ी हैं। वहीं, लखपति महिला योजना के तहत प्रदेश की 28.15 लाख से अधिक महिलाएं सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर लखपति दीदी बन चुकी हैं।

इस अवसर पर विभाग के अपर मुख्य सचिव, निदेशक महिला कल्याण, निदेशक बाल विकास एवं पुष्टाहार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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