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शिक्षक दिवस पर साइबर गुरु बने इंदौर के पुलिस अधिकारी, छात्रों को सिखा रहे डिजिटल सुरक्षा के गुर

इंदौर। शिक्षक दिवस पर आमतौर पर उन शिक्षकों को याद किया जाता है, जो विद्यार्थियों को शिक्षा देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार करते हैं। लेकिन इंदौर पुलिस में पदस्थ एडीशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने शिक्षक की भूमिका को एक अलग रूप दिया है। खाकी वर्दी में रहते हुए वे छात्रों और आम लोगों को साइबर अपराधों से बचने और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने की जानकारी दे रहे हैं।

आज के दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ती चुनौती बन गया है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों के बीच राजेश दंडोतिया ने पुलिस कार्रवाई के साथ साइबर जागरूकता को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है।

स्कूल-कॉलेजों में पहुंचकर दे रहे साइबर सुरक्षा का पाठ

राजेश दंडोतिया स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, सोसायटियों और सार्वजनिक मंचों पर पहुंचकर लोगों को साइबर अपराधियों के तरीकों के बारे में बताते हैं। उनका उद्देश्य है कि लोग ठगी का शिकार होने से पहले ही अपराधियों की चाल को समझ सकें और सतर्क रहें।

उनकी जागरूकता मुहिम सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। युवा, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक भी इस अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट से ऑनलाइन फ्रॉड तक, हर खतरे पर जागरूकता

साइबर जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान वे डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी कॉल, ओटीपी ठगी, संदिग्ध लिंक और सोशल मीडिया अपराधों को लेकर लोगों को सतर्क करते हैं।

वे लोगों को समझाते हैं कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या निजी जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। उनका संदेश है कि साइबर अपराध से बचाव के लिए तकनीक के साथ सतर्कता भी बेहद जरूरी है।

साइबर जागरूकता अभियान ने दिलाई अलग पहचान

राजेश दंडोतिया के लगातार साइबर जागरूकता अभियानों और साइबर पाठशालाओं ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। उनके प्रयासों के जरिए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और आम नागरिकों तक डिजिटल सुरक्षा का संदेश पहुंचा है। साइबर जागरूकता के क्षेत्र में उनके अभियानों का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।

अपराध होने के बाद कार्रवाई से पहले बचाव पर जोर

राजेश दंडोतिया का मानना है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता और सतर्कता है। उनका प्रयास केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को पहले से जागरूक करना भी है, ताकि वे साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।

शिक्षक दिवस पर उनकी यह पहल बताती है कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं होती। सही जानकारी देकर समाज को सुरक्षित बनाना भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी सोच के साथ राजेश दंडोतिया खाकी वर्दी में ‘साइबर गुरु’ की भूमिका निभा रहे हैं।

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