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मेरठ में 50 ई-बसों का संचालन ठप, 200 परिचालकों ने की हड़ताल; 3 महीने से नहीं मिली सैलरी

मेरठ। शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली इलेक्ट्रिक सिटी बसों का संचालन शुक्रवार सुबह 6 बजे से ठप हो गया। वेतन भुगतान में कथित कटौती और पिछले तीन महीने से सैलरी नहीं मिलने से नाराज करीब 200 बस परिचालकों ने हड़ताल कर दी। सभी बसों को डिपो में खड़ा कर दिया गया।

हड़ताल के चलते शहर में चलने वाली करीब 50 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रभावित हुआ। सुबह के समय बसें नहीं चलने से दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

₹4.26 प्रति किलोमीटर भुगतान का था दावा

मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (MCTSL) ने ई-बसों के परिचालकों की व्यवस्था का ठेका रायबरेली की एसएस एंटरप्राइजेज एजेंसी को दिया है। परिचालकों के मुताबिक, कंपनी और ठेकेदार के बीच उन्हें ₹4.26 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करने की बात तय हुई थी।

परिचालकों का आरोप है कि तीन महीने तक वेतन नहीं दिया गया। इसके बाद जब भुगतान किया गया तो खाते में सिर्फ ₹3.16 प्रति किलोमीटर की दर से रकम भेजी गई। कर्मचारियों का कहना है कि उनके भुगतान में ₹1.10 प्रति किलोमीटर की कटौती की गई है।

पूरी रकम मिलने तक बसें नहीं चलाने का ऐलान

वेतन में कथित कटौती और बकाया भुगतान से नाराज परिचालकों ने सुबह 6 बजे से बसों का संचालन रोक दिया। हड़ताल की जानकारी मिलते ही विभाग के एआरएम दुष्यंत और बस संचालन प्रभारी सचिन सक्सेना मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने परिचालकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। परिचालकों ने कहा कि जब तक पूरी रकम का भुगतान और बकाया वेतन नहीं मिलता, तब तक कोई भी बस डिपो से बाहर नहीं निकाली जाएगी।

परिचालक शाखा के मंत्री कवींद्र ने आरोप लगाया कि कंपनी ने ₹4.26 प्रति किलोमीटर भुगतान का वादा किया था। तीन महीने तक वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। अब भुगतान में भी कटौती की गई है।

एजेंसी से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश

बस संचालन प्रभारी सचिन सक्सेना ने बताया कि आउटसोर्सिंग एजेंसी एसएस एंटरप्राइजेज और परिचालकों के बीच भुगतान की दर और बकाया वेतन को लेकर विवाद हुआ है। इसी वजह से बसों का संचालन प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि परिचालकों की मांगों को सुना गया है और ठेका एजेंसी के प्रतिनिधियों से संपर्क कर जल्द विवाद का समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।

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