लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा नेताओं की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि निषाद पार्टी के भविष्य और सीटों की चिंता करने के बजाय सपा को अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है। उन्होंने सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी तंज कसा। उनका कहना है कि एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन बराबरी और हिस्सेदारी के आधार पर है। ये दावे संजय निषाद के राजनीतिक बयान हैं।
कसरवल कांड का भी किया जिक्र
संजय निषाद ने अपने बयान में गोरखपुर के कसरवल कांड का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाए। कसरवल में निषाद आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा हुई थी और एक व्यक्ति की मौत हुई थी। इस मामले में संजय निषाद के खिलाफ भी मुकदमा चला है और उन्होंने आरोपों से इनकार किया है।
संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज उस घटना और आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई को नहीं भूला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हक की मांग करने वालों पर गोलियां चलवाई गईं और अब वही लोग समाज के हितैषी बनने का दावा कर रहे हैं।
सपा के टूटने का किया दावा
संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के संगठन को लेकर भी दावा किया कि पार्टी के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि सपा को निषाद पार्टी के राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के बजाय अपनी पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सपा को विचार करना चाहिए। निषाद ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी का जनाधार सिकुड़ रहा है, जबकि निषाद पार्टी का आधार बढ़ रहा है।
राजनीतिक मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने हाल ही में सपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की थी। निषाद ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया था और कहा था कि वह पांडेय का स्वास्थ्य जानने गए थे।
इससे पहले गोंडा में निषाद समाज से जुड़े व्यापारी विनोद सहानी की हत्या के मामले में संजय निषाद ने प्रदर्शन भी किया था। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए थे।
संजय निषाद ने अपने बयान के अंत में निषाद समाज की राजनीतिक भागीदारी और स्वाभिमान की बात करते हुए “जय निषाद राज” का नारा दिया।
