लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि नियुक्ति के बाद किसी भी अभ्यर्थी से पैसे की मांग करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी भी चयनित अभ्यर्थी से नियुक्ति या ज्वाइनिंग के नाम पर लेनदेन की बात करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद पैसे की मांग की जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
3,567 अभ्यर्थियों को मिले नियुक्ति पत्र
कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) और 2,372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल हैं। इन नियुक्तियों से प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और संस्था प्रधानों के पदों पर नई तैनाती होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार नियुक्ति पत्र देती जाएगी और विपक्ष आंकड़े गिनता रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की और ‘सैफई सिंडिकेट’ का उल्लेख किया।
2015-16 में पैसे मांगने का उदाहरण बताया
मुख्यमंत्री ने एक नवनियुक्त अभ्यर्थी का जिक्र करते हुए कहा कि उसने बताया था कि 2015-16 में भी उसने इसी पद के लिए आवेदन किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी और अधिक पैसे देने वाले दूसरे अभ्यर्थी के कारण उसे नौकरी नहीं मिल सकी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में पूरी प्रक्रिया निरस्त हुई और अब उसी अभ्यर्थी को संबंधित पद पर नियुक्ति मिली है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर चयन की बात कही।
अगले छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियों का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य दोहराया।
उन्होंने कहा कि युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का भ्रष्टाचार या लेनदेन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों से नए भारत की नींव मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करें।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, 3,567 नवनियुक्त शिक्षक यदि प्रतिवर्ष औसतन 100 विद्यार्थियों से संवाद और मार्गदर्शन करते हैं तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक उनका प्रभाव पहुंचेगा। उन्होंने शिक्षकों से 2047 के भारत का नेतृत्व करने वाली पीढ़ी को तैयार करने का आह्वान किया।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, प्रयोगशालाओं और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन विद्यार्थियों की प्रतिभा को दिशा देने और उन्हें समाज व देश के लिए तैयार करने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
एनसीटीई को पत्र लिखने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में धरना दे रहे युवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र लिखने और ऐसे अभ्यर्थियों के लिए किसी व्यवस्था या रिलैक्सेशन की संभावना तलाशने को कहा, ताकि वे निर्धारित समय के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो सकें।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और संस्था प्रधानों की नियुक्ति प्रक्रिया का यह चरण पूरा हुआ।
