रिपोर्ट: प्रिया बाजपेयी शुक्ला
उत्तर प्रदेश में निलंबित ड्राइविंग लाइसेंस को दोबारा सक्रिय कराने के नियम में बदलाव किया गया है। अब लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद उसकी अवधि पूरी होने पर वाहन चालक को अधिकृत ट्रेनिंग सेंटर से रिफ्रेशर कोर्स करना होगा। कोर्स पूरा किए बिना सारथी पोर्टल पर लाइसेंस एक्टिवेट नहीं होगा।
लखनऊ में शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में घसियारी मंडी निवासी प्रिंस सोनकर और विकास नगर निवासी सौरभ विश्वकर्मा के ड्राइविंग लाइसेंस एक महीने के लिए निलंबित किए गए थे। निलंबन की अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों के लाइसेंस सारथी पोर्टल पर सक्रिय नहीं हो सके। जांच में सामने आया कि दोनों ने निर्धारित रिफ्रेशर कोर्स नहीं किया था।
परिवहन विभाग के मुताबिक, लखनऊ में ऐसे एक हजार से अधिक वाहन चालक हैं, जिनके निलंबित लाइसेंस को दोबारा सक्रिय कराने के लिए रिफ्रेशर कोर्स करना जरूरी होगा।
सात तरह के कोर्स की व्यवस्था
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में रिफ्रेशर कोर्स की प्रशिक्षण व्यवस्था शुरू हो चुकी है, वहां यह नियम लागू कर दिया गया है। अन्य जिलों में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा। प्रशिक्षण के तहत सात तरह के कोर्स निर्धारित किए गए हैं, जिनकी अवधि दो दिन से लेकर डेढ़ महीने तक हो सकती है।
ड्राइविंग कौशल सुधारने पर जोर
रिफ्रेशर कोर्स का उद्देश्य वाहन चालकों के ड्राइविंग कौशल को बेहतर करना है। प्रशिक्षण के बाद चालक ऑटोमेटेड टेस्टिंग ट्रैक पर होने वाली ड्राइविंग परीक्षा को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे।
फिलहाल यह व्यवस्था निलंबित ड्राइविंग लाइसेंस वाले वाहन चालकों के लिए लागू की जा रही है। वहीं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से भविष्य में सभी वाहन चालकों के लिए रिफ्रेशर प्रशिक्षण अनिवार्य करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दो दिन में 10 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करना होगा। सरकारी वाहन चालकों के लिए हर पांच साल में प्रशिक्षण प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य किए जाने की योजना भी बताई गई है।
