गोरखपुर गोरखनाथ मंदिर में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में चल रहे साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का भी हिस्सा था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के आंदोलन में गोरक्षपीठ की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने संत समाज को एकजुट करने के साथ श्रीराम मंदिर और सामाजिक-राष्ट्रीय विषयों से जुड़े कार्यों में अपना जीवन समर्पित किया।
सीएम योगी ने कहा कि समय, समाज और राष्ट्र के अनुरूप आगे बढ़ना महापुरुषों की विशेषता होती है। उन्होंने कहा कि दोनों संतों के जीवन से स्थिरता, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की प्रेरणा मिलती है।
‘जिसका गुणगान करें, उसके अनुरूप बनने का प्रयास भी करें’
मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और शिवभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति जिस आदर्श का गुणगान करता है, उसे अपने जीवन में भी उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन और अनुकूल दोनों परिस्थितियों में समान भाव बनाए रखना जरूरी है।
सीएम योगी ने कहा कि भगवान शिव ने विषम परिस्थितियों में विष को अपने कंठ में धारण किया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। उनके अनुसार समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर लोक कल्याण का रास्ता तैयार करना ही शिवत्व की भावना है।
महंत दिग्विजयनाथ के आदर्शों को आगे बढ़ाया: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ के जीवन के संकल्प उनके गुरु महंत दिग्विजयनाथ के विचारों और आदर्शों का विस्तार थे। उन्होंने महंत अवेद्यनाथ द्वारा सामाजिक समरसता के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज को संगठित और मजबूत बनाने के पक्षधर थे, जबकि महंत अवेद्यनाथ ने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए लगातार काम किया। उनके द्वारा चलाया गया सहभोज अभियान भी इसी उद्देश्य से जुड़ा था।
शिक्षा और कौशल विकास पर भी दिया जोर
सीएम योगी ने महंत अवेद्यनाथ के शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उसे कौशल और स्वावलंबन से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार शिक्षा और कौशल विकास के लिए कई संस्थाओं की स्थापना की गई।
उन्होंने छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक माहौल और आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था का भी उल्लेख किया। खेल और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति जैसी व्यवस्थाओं की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
संतों और अन्य अतिथियों ने भी दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत और राजस्थान के विधायक बालकनाथ सहित कई संतों और धर्माचार्यों ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि दी।
महंत बालकनाथ ने कहा कि दोनों संतों ने गोरक्षपीठ के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया। वहीं, जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने महंत अवेद्यनाथ को दूरदर्शी संत बताते हुए श्रीराम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य ने गोरक्षा और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यों में गोरक्षपीठ की भूमिका का उल्लेख किया। अयोध्या से आए महंत राजूदास ने भी महंत अवेद्यनाथ के श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े योगदान को याद किया।
शिक्षा, संस्कृति और लोककल्याण को भी किया याद
कार्यक्रम में गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ का जीवन शिक्षा, सामाजिक जागरण और लोककल्याण से जुड़े कार्यों के लिए समर्पित रहा।
श्रद्धांजलि सभा में सांसद, विधायक, विश्वविद्यालयों के कुलपति, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। कई सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों की ओर से दोनों संतों को श्रद्धांजलि दी गई।
‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त सचिव रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ का विमोचन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंच पर मौजूद अतिथियों ने किया।
श्रद्धांजलि सभा में छात्राओं ने सरस्वती वंदना और श्रद्धांजलि गीत प्रस्तुत किया। वैदिक मंगलाचरण, गोरक्षाष्टक पाठ और महंत अवेद्यनाथ स्त्रोतपाठ भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।
गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 24 से 30 सितंबर तक साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न दिनों में शिक्षा, लोकतंत्र, संस्कृत, भारतीय संस्कृति, नशामुक्ति और गो-सेवा जैसे विषयों पर सम्मेलन भी हुए।
