अलीगढ़ । नवरात्रि के पावन अवसर पर अलीगढ़ की सोनू मलान की कहानी महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आई है। जिस परिवहन क्षेत्र में लंबे समय से पुरुषों का दबदबा माना जाता रहा है, वहां सोनू ने अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास से अलग पहचान बनाई है।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के पद पर तैनात सोनू रोजाना अलीगढ़ से नोएडा के बीच बस चलाकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। उनकी कहानी बताती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं।

अलीगढ़ जिले के जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय सोनू मलान वर्ष 2021 से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में बस चालक के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें अलीगढ़ मंडल की इकलौती महिला बस चालक बताया जाता है। सोनू प्रतिदिन अलीगढ़ और नोएडा के बीच चार चक्कर लगाती हैं और करीब 540 किलोमीटर का सफर तय करती हैं।
यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाना उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी है। सड़क पर जब सोनू बस का स्टीयरिंग संभालती हैं तो उन्हें देखकर कई यात्री हैरान रह जाते हैं, लेकिन उनकी कुशल ड्राइविंग देखकर लोग उनकी सराहना भी करते हैं।
12 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया था ट्रैक्टर चलाना
सोनू मलान को बचपन से ही गाड़ियां चलाने का शौक था। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव में खेती-किसानी के कामों के लिए ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे यह शौक उनके जुनून में बदल गया। गाड़ी चलाने के प्रति उनकी रुचि इतनी मजबूत थी कि उन्होंने इसे अपने करियर के रूप में अपनाने का फैसला किया।
वर्ष 2021 में जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में महिला बस चालकों की भर्ती का अवसर आया तो सोनू ने भी आवेदन किया। चयन के बाद उन्हें अपने शौक को पेशे में बदलने का मौका मिला। इसी के साथ उनके जीवन की नई शुरुआत हुई। सोनू के साथ गाजियाबाद के सिकंदराबाद क्षेत्र की वेद कुमारी भी चयनित महिलाओं में शामिल थीं। बस चालक के रूप में काम शुरू करने के बाद सोनू ने अपनी मेहनत और जिम्मेदारी से यह साबित किया कि किसी पेशे को केवल महिला या पुरुष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
रोजाना 540 किलोमीटर का सफर, यात्रियों को पहुंचाती हैं मंजिल तक
सोनू मलान का रोजाना का काम आसान नहीं है। अलीगढ़ से नोएडा के बीच बस चलाते हुए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वह प्रतिदिन चार चक्कर लगाकर लगभग 540 किलोमीटर का सफर पूरा करती हैं। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा, समय और सड़क पर अनुशासन का ध्यान रखना उनकी जिम्मेदारी होती है।
बस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए महिला चालक को स्टीयरिंग संभालते देखना कई बार नया अनुभव होता है। शुरुआत में कुछ लोग उन्हें देखकर आश्चर्य जताते हैं, लेकिन उनके ड्राइविंग कौशल और आत्मविश्वास को देखकर तारीफ भी करते हैं। सोनू का काम उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं, लेकिन सामाजिक धारणाओं या लोगों की बातों के कारण आगे बढ़ने में संकोच करती हैं।

सोशल मीडिया पर भी सोनू की मजबूत पहचान
सोनू मलान की लोकप्रियता केवल सड़क और परिवहन तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके यूट्यूब चैनल पर करीब दो लाख, इंस्टाग्राम पर डेढ़ लाख और फेसबुक पर लगभग साढ़े छह लाख फॉलोअर्स हैं। इस तरह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उनके कुल फॉलोअर्स की संख्या 10 लाख से अधिक बताई जाती है।
सोनू सोशल मीडिया पर बस चलाने से जुड़े वीडियो साझा करती हैं। इन वीडियो के जरिए लोग उनके रोजमर्रा के काम, ड्राइविंग के अनुभव और पेशे से जुड़ी चुनौतियों को करीब से देख पाते हैं। उनकी यात्रा और काम के वीडियो कई लोगों के लिए प्रेरणा का माध्यम बने हैं। वह अपने काम के जरिए यह संदेश देती हैं कि आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी रुचि को पहचाने और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करे।
परिवार का मिला साथ, लोगों की सोच को दी चुनौती
सोनू मलान बताती हैं कि जब उन्होंने बस चालक बनने का फैसला किया तो कई लोगों ने कहा कि बस चलाना पुरुषों का काम है। हालांकि, उन्होंने ऐसी बातों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उनका कहना है कि उन्हें परिवहन निगम में अवसर मिला और उन्होंने अपनी मेहनत से उसे सार्थक बनाने का प्रयास किया।
इस सफर में उनके परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया। सोनू के भाई भी परिवहन निगम में बस चालक हैं, जबकि उनके पिता शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। परिवार के सहयोग और अपने आत्मविश्वास के दम पर सोनू ने उस क्षेत्र में पहचान बनाई, जहां महिलाओं की भागीदारी अभी भी सीमित मानी जाती है।
सोनू के मुताबिक, बस में सफर करने वाली कई महिलाएं उन्हें देखकर सुरक्षित महसूस करती हैं और उनके काम की सराहना करती हैं। कुछ महिलाएं उनसे प्रेरित होकर अपने सपनों को पूरा करने का भरोसा भी जताती हैं।
महिला सशक्तीकरण की बनीं मिसाल
नवरात्रि के दौरान सोनू मलान की कहानी नारीशक्ति, साहस और आत्मनिर्भरता का संदेश देती है। उनका सफर इस बात को रेखांकित करता है कि महिलाओं को अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो वे परंपरागत सीमाओं को पीछे छोड़कर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रयासों के बीच सोनू जैसी महिलाओं की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बस का स्टीयरिंग थामकर न केवल अपने सपने को साकार किया, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी रास्ता दिखाया है जो परंपरागत सोच से आगे बढ़कर अपने दम पर कुछ करना चाहती हैं। सोनू मलान की कहानी का संदेश साफ है—मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे जरूरी है हौसला, मेहनत और खुद पर भरोसा।
