लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रामलीला मैदान में इस बार दशहरा उत्सव तकनीक और परंपरा के अनूठे संगम के साथ मनाया जाएगा। यहां रावण का हाईटेक पुतला दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। यह पुतला खुद चलकर मैदान में आएगा, तलवार लहराएगा और इसके हाथ-पैर भी हिलेंगे। रावण दहन के बाद करीब 45 मिनट तक आतिशबाजी की जाएगी। आयोजन को खास तौर पर नई पीढ़ी यानी जेन-जी से जोड़ने की तैयारी की गई है।
ऐशबाग रामलीला कमेटी ने इस बार रामलीला मंचन में भी कई नए प्रयोग किए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कुछ दृश्यों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं, राम बारात में डिजिटल हाथी दिखाई देगा। आयोजकों का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक के जरिए रामायण के प्रसंगों को अधिक आकर्षक बनाया जाए और युवा पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ा जा सके।
500 साल पुरानी परंपरा से जुड़ा है ऐशबाग का आयोजन
ऐशबाग रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरिश्चंद्र के मुताबिक, कमेटी का दावा है कि गोस्वामी तुलसीदास ने करीब 500 साल पहले ऐशबाग में रामलीला मंचन की शुरुआत की थी। उनके अनुसार, 16वीं शताब्दी में तुलसीदास लखनऊ आए थे और करीब चार महीने तक यहां प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने आसपास के गांवों का भ्रमण किया और ऐशबाग में रामलीला मंचन शुरू कराया।
धीरे-धीरे यह परंपरा लखनऊ से निकलकर प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंची। लंबे समय तक अयोध्या के साधु-संत भी इस आयोजन से जुड़े रहे और रामलीला के मंचन में भाग लेते रहे। आज भी ऐशबाग की रामलीला शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में गिनी जाती है।
नवाब आसफुद्दौला ने रामलीला के लिए दी थी जमीन
ऐशबाग रामलीला की खास पहचान लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब भी है। कमेटी अध्यक्ष हरिश्चंद्र के मुताबिक, नवाब आसफुद्दौला ने ईदगाह और रामलीला के लिए छह-छह एकड़ जमीन दी थी। रामलीला मैदान के सामने ही ऐशबाग ईदगाह स्थित है।
यहां ईद और बकरीद के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने पहुंचते हैं, जबकि दशहरे पर रामलीला में भी लोगों की भागीदारी रहती है। आयोजकों के अनुसार, दोनों समुदायों के बीच सहयोग और आपसी सौहार्द की परंपरा लंबे समय से बनी हुई है।
समय के साथ आधुनिक हुआ रामलीला मैदान
कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि अंग्रेजी शासन के दौरान भी रामलीला आयोजन को सरकारी सहायता मिलती रही। वर्तमान में प्रशासन की ओर से सफाई, रोशनी, साउंड, फॉगिंग और पानी जैसी व्यवस्थाओं में सहयोग दिया जाता है। नगर दर्शन और शोभायात्रा के आयोजन में भी जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग की भूमिका रहती है।
उन्होंने बताया कि पहले रामलीला मैदान की बनावट अलग थी। बीच में गहरा मंच होता था और चारों तरफ सीढ़ीनुमा बैठने की व्यवस्था थी, जहां दर्शक बैठकर रामलीला देखते थे। समय के साथ मैदान का स्वरूप बदला और इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया।
इस बार हाईटेक रावण, AI से तैयार दृश्य, डिजिटल हाथी और लंबी आतिशबाजी के जरिए ऐशबाग रामलीला में परंपरा के साथ तकनीक का नया रंग देखने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य रामलीला की ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए भी आकर्षक बनाना है।
