लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बुधवार को GVK EMRI कार्यालय के बाहर एम्बुलेंस टेक्नीशियनों ने नौकरी पर दोबारा बहाली की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आश्वासन के बावजूद कंपनी उन्हें नौकरी पर वापस नहीं रख रही है। कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द न्याय दिलाने की मांग की।
धरने की अगुवाई कर रहे एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शरद यादव ने दावा किया कि प्रदर्शन में करीब तीन से चार हजार टेक्नीशियन शामिल हुए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी ने बिना कोई ठोस कारण बताए वर्ष 2021 में करीब नौ हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। कर्मचारियों ने कहा कि वे वर्ष 2012 से प्रदेश में एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से लोगों की मदद कर रहे थे। कोविड के दोनों दौर में भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया, लेकिन बाद में उन्हें बेरोजगारी का सामना करना पड़ा।
कंपनी के अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप
शरद यादव के मुताबिक, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कंपनी के अधिकारियों से बातचीत कराकर कर्मचारियों को दोबारा जॉइनिंग दिलाने का भरोसा दिया था। उनके अनुसार, कंपनी के अधिकारियों को कर्मचारियों की सूची भी भेजी गई, लेकिन अब तक बहाली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब वे अपनी मांगों को लेकर कंपनी कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारी उनसे बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हुए। कर्मचारियों ने दावा किया कि कार्यालय के गेट पर ताला लगाकर अधिकारी वहां से चले गए।
एसोसिएशन के सदस्य संजीव सिंह ने कंपनी पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए सरकार से कार्रवाई करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बिना नोटिस नौकरी से निकालने और फुल एंड फाइनल भुगतान नहीं करने के आरोपों की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि कंपनी कर्मचारियों को दोबारा नौकरी पर नहीं रखना चाहती, तो उनका बकाया भुगतान कर दिया जाए।
स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता के बाद भी नहीं मिला जवाब
प्रदीप चौधरी ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया गया था। उनके अनुसार, 2 अक्टूबर को धरना शुरू होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था और कंपनी के अधिकारी टीवीएस रेड्डी से फोन पर बात भी कराई थी। उस दौरान कंपनी ने कर्मचारियों की सूची लेकर दो दिन में जवाब देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई सूचना नहीं मिली।
प्रदीप चौधरी ने टीवीएस रेड्डी से कर्मचारियों के बीच खुली बैठक कर उनकी समस्याएं सुनने, समायोजन करने और न्याय दिलाने की मांग की। वहीं, संतकबीरनगर से पहुंचे आर्यन चौधरी ने भी दावा किया कि डिप्टी सीएम की ओर से कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट को कर्मचारियों की सूची भेजकर दोबारा जॉइनिंग कराने के लिए कहा गया था, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हुई।
100 किलोमीटर दूर ट्रांसफर के बाद नौकरी जाने का आरोप
प्रदर्शन में शामिल भदोही की किरण ने बताया कि वह कोरोना काल में एम्बुलेंस सेवा में कार्यरत थीं। बाद में उनका तबादला करीब 100 किलोमीटर दूर कर दिया गया। किरण के मुताबिक, महिला होने के कारण इतनी दूर जाकर ड्यूटी करना उनके लिए संभव नहीं था, जिसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके जैसी नौकरी से निकाली गई महिलाओं की संख्या करीब 500 हो सकती है।
नौकरी मिलने तक लखनऊ नहीं छोड़ने का ऐलान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने घर छोड़कर लखनऊ पहुंचे हैं और अब नौकरी पर बहाली होने तक वापस नहीं लौटेंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर कंपनी के अधिकारियों से बातचीत कराने और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर जल्द फैसला लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, डिप्टी सीएम ने एक बार फिर कंपनी से बातचीत कराने का भरोसा दिया है।
