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यूपी में 26 अक्टूबर को धूमधाम से मनेगी महर्षि वाल्मीकि जयंती, मंदिरों में होंगे दीपदान और रामायण पाठ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना रामायण में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है।

चित्रकूट स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के अनुसार, यहां रामलीला मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की ओर से लोक भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही तमसा गंगा नदी, जिसे वाल्मीकि नदी के नाम से भी जाना जाता है, के घाट पर वाल्मीकि आरती का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

यूपी के कई ऐतिहासिक स्थलों पर होंगे आयोजन

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की ओर से रचित रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। रामायण से जुड़े अनेक स्थलों को राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाना जाता है। देशभर में ऐसे करीब 280 ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख स्थान शामिल हैं।

इन स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के लिए मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ आठ, 12 या 24 घंटे तक लगातार वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य प्रमुख मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

लवकुश प्रसंग समेत होंगे विविध कार्यक्रम

प्रदेश में तुलसीदास आश्रम राजापुर, चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर, कानपुर, वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर आयोजन किए जाएंगे। कार्यक्रमों में पूजन-हवन और लवकुश प्रसंग से जुड़े आयोजन भी शामिल होंगे।

व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिलों में जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति कार्यक्रम स्थलों और कलाकारों का चयन करेगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के साथ आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

कलाकारों के मानदेय के लिए 75 लाख रुपये

सरकार की ओर से कलाकारों के मानदेय के भुगतान के लिए प्रत्येक जिले को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों को कुल 75 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्यक्रमों की अन्य व्यवस्थाएं जिला प्रशासन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से करेगा।

गायक कलाकारों और भजन मंडलियों का चयन कर उन्हें समय से सूचना दी जाएगी। संबंधित मंदिरों और धार्मिक स्थलों के नाम-पते, तस्वीरें, जीपीएस लोकेशन और प्रबंधकों के संपर्क विवरण संस्कृति विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार का कहना है कि इन आयोजनों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि की विरासत को सम्मान देने और रामायण के संदेशों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

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