लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत फार्मासिस्टों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट संवर्ग के पदनाम बदलने की तैयारी तेज हो गई है। लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद अब फार्मासिस्टों को फार्मेसी अधिकारी और मुख्य फार्मासिस्ट को मुख्य फार्मेसी अधिकारी के नाम से पहचान दिए जाने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया गया है।
इस बदलाव से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत 10 हजार से अधिक फार्मासिस्ट प्रभावित होंगे। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के लिए शासन की अंतिम मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना जारी होना अभी बाकी है।
शासन को भेजा गया पदनाम परिवर्तन का प्रस्ताव
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग के महानिदेशक ने फार्मासिस्ट संवर्ग के पदनाम में बदलाव से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बाद प्रस्ताव को अधिसूचना जारी करने के लिए शासन को अग्रसारित किया गया है। शासन स्तर से अंतिम अनुमति मिलने के बाद नई पदनाम व्यवस्था लागू हो सकेगी।
प्रस्ताव के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट अब फार्मेसी अधिकारी कहलाएंगे। वहीं, मुख्य फार्मासिस्ट का पदनाम बदलकर मुख्य फार्मेसी अधिकारी किया जाएगा। विभागीय स्तर पर इस पहल को फार्मासिस्ट संवर्ग की पहचान में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लंबे समय से उठ रही थी पदनाम बदलने की मांग
फार्मासिस्ट संगठनों की ओर से लंबे समय से पदनाम में बदलाव की मांग की जा रही थी। डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन ने इस संबंध में शासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने अपनी मांग रखी थी।
संगठन से जुड़े डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए शासन को भेज दिया है। संगठन का मानना है कि नए पदनाम से फार्मासिस्ट संवर्ग की पेशेवर पहचान को नई पहचान मिलेगी। इसी मांग को पूरा कराने के लिए संगठन लगातार प्रयास कर रहा था।
अन्य पदों के नाम पहले जैसे ही रहेंगे
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जेके सचान और महामंत्री प्रद्युम्न सिंह ने बताया कि प्रस्ताव में फिलहाल फार्मासिस्ट और मुख्य फार्मासिस्ट के पदनाम में बदलाव शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रभारी अधिकारी (फार्मेसी), विशेष कार्याधिकारी (फार्मेसी) और उप निदेशक (फार्मेसी) के पदनाम में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। ये पद पहले की तरह ही बने रहेंगे।
10 हजार से अधिक फार्मासिस्टों पर पड़ेगा असर
उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में 10 हजार से अधिक फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। प्रस्ताव को शासन की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इन कर्मचारियों के पदनाम बदल जाएंगे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को शासन से हरी झंडी मिलने और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है।
लंबे समय से इस मांग को उठा रहे फार्मासिस्ट संगठनों की नजर अब शासन के अगले कदम पर टिकी है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में फार्मासिस्ट संवर्ग की आधिकारिक पहचान में बदलाव हो जाएगा।
