समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में जबरदस्त प्रदर्शन किया है और देश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है. सपा ने यूपी में 80 में से 37 सीट जीती है.
लेकिन चुनाव नतीजों में कुछ सीटों पर जो फ़ैसले आए उससे लोग अब भी हैरान हैं, और ऐसी ही एक सीट थी उत्तर प्रदेश की फ़ैजाबाद सीट. अयोध्या फ़ैजाबाद संसदीय क्षेत्र में पड़ता है, जहाँ चुनाव से पहले जनवरी में बीजेपी ने श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करवाई थी.
मोदी सरकार ने बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर बनने को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था. लेकिन बीते मंगलवार को जब नतीजे आए तो बीजेपी इस सीट पर हार गई.
बीजेपी की ओर से मैदान में थे दो बार से अयोध्या से ही सांसद रहे लल्लू सिंह, जिन्हें समाजवादी के पुराने नेता अवधेश प्रसाद ने हरा दिया. हार का अंतर 50 हज़ार वोटों से अधिक था.
लोग अवधेश प्रसाद की इस जीत को बीजेपी के हिंदुत्व के कैंपेन का जवाब मान रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अवधेश प्रसाद ने कहा है कि मैं बीजेपी के ख़िलाफ़ नहीं लड़ रहा था, ये लोग थे जो बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे. सबसे ज़्यादा समर्थन हमें दलितों से मिला.
उन्होंने इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में कहा, “बीजेपी राम मंदिर का क्रेडिट लेना चाह रही थी जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बना है. वो मंदिर का राजनीतिक लाभ लेना चाह रहे थे और लोगों को बेरोज़गारी, ग़रीबी, मंहगाई और किसानों के मुद्दे से भटकना चाहते थे.”
“मैं बीजेपी के खिलाफ़ नहीं लड़ रहा था, ये लोग थे जो बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे. हमें सबसे बड़ा समर्थन दलित भाइयों से मिला जो बीजेपी की नीतियों के असल भुक्तभोगी हैं, दलितों के साथ-साथ ओबीसी और अल्पसंख्यकों का भी साथ मिला. हमें किसानों का भी साथ मिला और वो साथ किसी भी जाति से परे था. किसान आवारा पशुओं से परेशान थे.”
