Homeउत्तर प्रदेशलोहिया संस्थान में पहला पीडियाट्रिक ट्रामा रिससिटेशन मॉड्यूल विकसित

लोहिया संस्थान में पहला पीडियाट्रिक ट्रामा रिससिटेशन मॉड्यूल विकसित

लखनऊ: डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में प्रो सीएम सिंह, निदेशक के मार्गदर्शन में डॉ आरएमएलआईएमएस में बाल रोग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नेहा ठाकुर ने दक्षिण पूर्व एशिया का पहला पीडियाट्रिक ट्रामा रिससिटेशन मॉड्यूल विकसित किया। डॉ नेहा ठाकुर द्वारा यह परियोजना आईसीएमआर प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रो समीर मिश्रा के ट्रामा सेन्टर, केजीएमयू के सहयोग से बनाई गई।

पीडियाट्रिक ट्रामा रिससिटेशन मॉड्यूल के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु एम्स भोपाल में डॉ0 नेहा ठाकुर और डॉ0 सागर गलवांकर सीईओ इनडसएम के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। डॉ ठाकुर के पीडियाट्रिक इमरजेंसी मेडिसिन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु Dr.Kello O’Keefe Academician and Researcher INDUSEM 2024 एम्स भोपाल द्वारा इस वर्ष आयोजित वार्षिक राष्ट्रीय आपातकालीन चिकित्सा सम्मेलन में नवाजा गया।

डॉ0 ठाकुर को आरसीपीसीएच की प्रतिष्ठित फैलोशिप से नवाजा जा चुका है। इस बाल चिकित्सा आघात पुनर्जीवन मॉड्यूल का उद्देश्य जीवन.घातक घटनाओं की प्रारंभिक पहचान में साक्ष्य.आधारित अभ्यास के उपयोग को बढ़ावा देना और बाल चिकित्सा आघात रोगियों के समय पर प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है।

इसका प्रथम ट्रेनिग ऑफ टीचर्स सत्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। एम्स, नई दिल्ली, सीएमसी वेल्लोर, यूसीएमएस दिल्ली, एम्स जोधपुर के चिकित्सको को कनाडा एवं यूएसए से आई विशेषज्ञों की टीम ने दो दिनों की अवधि में प्रशिक्षित किया गया। पीटीआरएम को ICMR, NIHFW, WHO-SEARO, The University of Michigan, INDUSEM, ACEE-EMA, and IAP-PEM से समर्थन प्राप्त हुआ है ।

आप एक ऐसे बच्चे को कैसे संभालेंगे जो पहली मंजिल की बालकनी से गिर गया, आतिशबाजी के साथ खेला और गंभीर रूप से जल गया, एक कार दुर्घटना में घायल हो गया ? और कई अन्य प्रश्नो का उत्तर देता है यह मॉड्यूल । डॉ नेहा ठाकुर के अनुसार, बाल चिकित्सा चोट देखभाल का मतलब केवल छोटे वयस्क में चोटों का प्रबंधन करना नहीं है, जैसा कि कोई सोच या कल्पना कर सकता है। विकास के विभिन्न चरणों में बच्चे के शरीर की संरचना और कार्यों में निहित अंतर के कारण यह वयस्क आघात प्रबंधन से काफी भिन्न होता है।

निदेशक प्रो डॉ सीएम सिंह ने डॉ नेहा ठाकुर को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। डॉ0 सिंह ने 9 अगस्त को हुई स्कूल वैन दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा कि यह मानकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल बाल चिकित्सा आघात से सफलतापूर्वक निपटने और प्रबंधन में मदद करेगा।

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