सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर कांग्रेस के लगाए गए आरोपों के बाद आईसीआईसीआई बैंक का बयान सोमवार की शाम को आया था. इस पर अब कांग्रेस ने मंगलवार को जवाब दिया है.
कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, “हमनें तीन लोगों से सवाल किए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सेबी की चेयरपर्सन और आईसीआईसीआई बैंक से सवाल पूछे थे. इसमें कौन मोहरा और कौन खिलाड़ी नहीं मालूम, लेकिन एक मोहरे आईसीआईसीआई बैंक का जवाब आया.”
उन्होंने कहा कि इस घोटाले की एक परत आईसीआईसीआई बैंक के जवाब से खुली.
पवन खेड़ा ने कहा, “आईसीआईसीआई कहता है कि माधवी पुरी बुच को रिटायरल बेनिफिट मिला. टेबल खोलिए तो आप देखेंगे कि माधवी पुरी बुच रिटायर हुईं तो उन्हें 2013-14 71.90 लाख रुपये की ग्रेच्युटी मिली. 2014-15 में उन्हें 5.36 करोड़ रुपये रिटायरमेंट कम्यूटेड पेंशन मिली.”
पवन खेड़ा ने सवाल किया कि ‘मुझे बताओ कि रिटायरमेंट के बाद पेंशन का अमाउंट बदलता रहता है क्या? बीच में बंद हो जाता है क्या? 2014-15 में माधबी पुरी बुच और आईसीआईसीआई के बीच सेटलमेंट हो गया था और 2015-16 में उन्हें आईसीआईसीआई से कुछ नहीं मिला तो फिर 2016-17 में फिर से क्यों मिलनी शुरू हो गई. ये कैसी पेंशन है.’
पवन खेड़ा ने कहा कि अब अगर साल 2007-2008 से 2013-14 तक की माधबी पुरी बुच की औसत सैलरी निकाली जाए, जब वो आईसीआईसीआई में थीं तो वो क़रीब 1.30 करोड़ रुपये थी, लेकिन माधबी पुरी बुच की पेंशन का औसत 2.77 करोड़ रुपये है.
उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी नौकरी है, जिसमें पेंशन.. सैलरी से ज़्यादा है. उम्मीद है कि माधबी पुरी बुच जवाब देंगी कि 2016-17 में तथाकथित पेंशन फिर से क्यों शुरू हो गई थी?
आईसीआईसीआई बैंक ने क्या जवाब दिया था?
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि माधबी पुरी बुच सेबी की पूर्णकालिक सदस्य होने के बावजूद आईसीआईसीआई बैंक से नियमित रूप से इनकम ले रही थीं, जो कि 16.80 करोड़ रुपये थीं.
इस पर आईसीआईसीआई बैंक ने बयान जारी कर कहा है कि बैंक छोड़ने के बाद उसने रिटायरमेंट लाभ के अलावा कोई भी तनख़्वाह या ग्रांट एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शंस माधुरी बुरी बुच को नहीं दिए हैं.
