लखनऊ के अमीनाबाद में नकली और अमानक दवाओं के कारोबार से जुड़े कथित बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच के बाद कैसरबाग थाने में पांच आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच में आरोप है कि रद्द हो चुके औषधि लाइसेंस, जीएसटी नंबर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी सेल्स इनवाइस तैयार किए गए। इसके जरिए नामी कंपनियों के ब्रांड की संदिग्ध दवाओं की बिक्री की गई और कथित तौर पर जीएसटी चोरी के लिए डिजिटल रिकॉर्ड भी मिटाए गए।
मामला जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड की शिकायत से सामने आया। कंपनी ने अमीनाबाद स्थित शिव शक्ति मेडिकल से क्लाप-जी क्रीम के संदिग्ध बैच की आपूर्ति की जानकारी दी थी। जांच के दौरान प्रतिष्ठान बंद मिला, जिसके बाद दवाओं की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई। बाद में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर पांच जनवरी 2026 को फर्म का औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। इसके बावजूद फर्म के नाम पर दवाओं की खरीद-बिक्री जारी रहने का आरोप है।
जुलाई में गाजियाबाद की एक दवा फर्म से ग्लेनमार्क की टेल्मा-एएम और टेल्मा-एच ब्रांड की संदिग्ध दवाएं बरामद होने के बाद जांच आगे बढ़ी। इनकी बिक्री शिव शक्ति मेडिकल के नाम से जारी कथित फर्जी इनवाइस के जरिए सामने आई।
औषधि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में बिना बिल दवाओं की आपूर्ति, बंद फर्मों के लाइसेंस और सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग तथा जीएसटी चोरी के कथित प्रमाण मिले हैं। विद्या फार्म के लैपटॉप में दवाओं के रिकॉर्ड और बैच हिस्ट्री डिलीट किए जाने के साक्ष्य भी मिलने का दावा किया गया है। वहीं, आरएन फार्मा जांच के दौरान बंद मिली, जिसे साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए सील कर दिया गया।
पुलिस ने कपिल जायसवाल, हरमीत सिंह, प्रियांशु पाल, साहिल जैदी और आबिद अली अतहर को आरोपित बनाया है। सभी के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
