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वाराणसी : 44वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को दिया संदेश, बेटियों से वेद-उपनिषद और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन करने की अपील

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि संस्कारवान, अनुशासित और शिक्षित युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को शिक्षा, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जुड़े संस्कारों के बल पर ही साकार किया जा सकता है।

राज्यपाल वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन सभागार में आयोजित 44वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जो दृश्य देखने को मिला, उससे पूरे महिला समाज का सिर शर्म से झुक गया। हालांकि उन्होंने किसी संगठन या घटना का नाम नहीं लिया, लेकिन युवाओं से मर्यादा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का पालन करने की अपील की।

बेटियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने की सलाह

राज्यपाल ने कहा कि संस्कृति से ही संस्कारों का निर्माण होता है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों से वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण जैसे भारतीय ज्ञान परंपरा के ग्रंथों का अध्ययन करने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है।

डिजिटल लॉकर से मिली उपाधियां, मेधावियों को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 11,958 विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां डिजिटल लॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं। वहीं, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 29 मेधावी विद्यार्थियों को 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज और देश के विकास के लिए किया जाए। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

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