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सतीश महाना के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप, अनूप गुप्ता पर एफआईआर

रिपोर्ट – अभिषेक मिश्रा

कानपुर। विधानसभा अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक सतीश महाना के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अमर्यादित, असंसदीय और वैमनस्यपूर्ण शब्दों का प्रयोग कर सूचनाएं प्रसारित किए जाने के मामले में अनूप गुप्ता के खिलाफ थाना नजीराबाद, कानपुर नगर में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उपलब्ध शिकायत एवं प्रेस विज्ञप्ति में इस मामले को लेकर अनूप गुप्ता के खिलाफ पूर्व में दर्ज रहे कई मुकदमों और शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।

शिकायत के मुताबिक, दिनांक 12 सितंबर 2026 को एक प्रथम सूचना रिपोर्ट के माध्यम से अनूप गुप्ता के खिलाफ सोशल मीडिया पर सूचनाएं प्रकाशित करने का मामला दर्ज कराया गया। आरोप है कि सोशल मीडिया के माध्यम से क्षेत्रीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के खिलाफ अमर्यादित, असंसदीय और वैमनस्यपूर्ण शब्दों का प्रयोग किया गया। मामले में मु0अ0सं0 350/2026, धारा 356 बीएनएस एवं 67 आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने का उल्लेख किया गया है।

पत्रकारिता की आड़ में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप

प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि अनूप गुप्ता पत्रकारिता के नाम पर सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी पोस्ट प्रसारित करते रहे हैं, जिनमें समाज के सम्मानित एवं महत्वपूर्ण व्यक्तियों के खिलाफ कथित तौर पर अनर्गल और आपत्तिजनक बातें कही जाती हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इस तरह की पोस्ट से संबंधित व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने के साथ-साथ आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि अनूप गुप्ता के खिलाफ पूर्व में भी इसी प्रकार की शिकायतें और मुकदमे दर्ज हुए हैं। इन्हीं मामलों का विवरण वर्तमान शिकायत के साथ अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने की बात कही गई है।

2015 के मामले में प्रेस कार्ड को लेकर जांच का उल्लेख

शिकायत में वर्ष 2015 के एक मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, दिनांक 1 अप्रैल 2015 को मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री के समक्ष एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। मामले की जांच एलआईयू तथा सक्षम एजेंसी द्वारा किए जाने की बात कही गई है।

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि जांच के दौरान अनूप गुप्ता के अलग-अलग नामों से जारी प्रेस कार्ड सामने आए थे। इसमें कार्ड संख्या 162 और 170 तथा अलग-अलग पते होने का भी उल्लेख किया गया है। इसके बाद दिनांक 13 अप्रैल 2015 को मान्यता समाप्त किए जाने तथा दिनांक 26 अगस्त 2015 को संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।

इस संबंध में मु0अ0सं0 442/2015, धारा 66डी आईटी एक्ट एवं 46ए आईपीसी के तहत थाना हजरतगंज, लखनऊ में मामला दर्ज होने का उल्लेख प्रेस विज्ञप्ति में किया गया है। इसमें वादी के रूप में हेमंत तिवारी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का नाम दिया गया है।

सोशल मीडिया और पत्रकारिता से जुड़े पुराने मामलों का भी हवाला

प्रेस विज्ञप्ति में वर्ष 2022 के एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें मु0अ0सं0 101/2022, धारा 66 आईटी एक्ट, 120बी, 506, 504 और 500 आईपीसी के तहत थाना हजरतगंज, लखनऊ में मुकदमा दर्ज होने की बात कही गई है। इसमें वादी के रूप में डॉ. नवनीत सहगल, आईएएस एवं तत्कालीन मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन का उल्लेख है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबर चलाने और सरकार एवं आम आदमी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने से संबंधित मामला था।

इसके अलावा वर्ष 2025 में थाना विभूतिखंड, लखनऊ में दर्ज एक मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें मु0अ0सं0 438/2025, धारा 308(2) और 356(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज होने की बात कही गई है। शिकायत में आरोप है कि एक मंत्री के संबंध में खबर प्रकाशित नहीं करने के एवज में धन की मांग की गई और ऐसा न करने पर फर्जी खबर चलाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था।

फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप का भी उल्लेख

शिकायत में एक अन्य पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि थाना विभूतिखंड, लखनऊ में मु0अ0सं0 227/2014, धारा 471, 468, 467 और 420 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके आधार पर शिकायत किए जाने से संबंधित आरोपों का उल्लेख है।

इसी तरह वर्ष 2024 के एक मामले में मु0अ0सं0 62/2024, धारा 500, 501, 504, 505, 420 और 120 आईपीसी तथा प्रेस एवं पुस्तक रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इस मामले में वादी के रूप में नरेश कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक प्रकाशन का नाम दिया गया है। शिकायत के अनुसार, मामला पीसीएफ संस्था और सरकार की छवि धूमिल करने तथा कथित भ्रामक खबरों के प्रसारण से संबंधित था।

कानपुर में दर्ज मामले का भी जिक्र

प्रेस विज्ञप्ति में कानपुर नगर के थाना रावतपुर में दर्ज वर्ष 2026 के एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें मु0अ0सं0 24/2026, धारा 352 और 351 बीएनएस के तहत मामला दर्ज होने की बात कही गई है।

शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर सार्वजनिक एवं गरिमामयी पोस्ट के माध्यम से कथित तौर पर आपत्तिजनक, अभद्र और अश्लील भाषा का इस्तेमाल कर लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था।

कई मामले न्यायालय में विचाराधीन होने का दावा

शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी कहा है कि अनूप गुप्ता के खिलाफ कानपुर तथा लखनऊ जनपद न्यायालयों में कई वाद विचाराधीन हैं। इनमें वाद संख्या 529/2015, 2181/2025, 5731/2025, 1101/2025 और 73832/2025 का उल्लेख किया गया है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) श्री रावत द्वारा भी अनूप गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है।

विपक्षी दलों की संलिप्तता का आरोप

शिकायत में अनूप गुप्ता के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकार और सरकार से जुड़े गणमान्य लोगों के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी, भ्रामक एवं अमर्यादित खबरें प्रसारित की जाती हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस गतिविधि में विभिन्न विपक्षी दलों की भागीदारी है और एक कथित साजिश के तहत ऐसी पोस्ट प्रसारित कर आर्थिक लाभ हासिल करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, ये शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता पक्ष ने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर अनूप गुप्ता द्वारा सोशल मीडिया और पत्रकारिता के माध्यम से की जा रही कथित गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अनूप गुप्ता के पूर्व मामलों, एफआईआर और न्यायालय में विचाराधीन वादों से संबंधित विवरण भी अधिकारियों के अवलोकन के लिए प्रस्तुत किए गए हैं।

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर संबंधित पोस्ट, गतिविधियों और उनके पीछे की परिस्थितियों की जांच किए जाने की मांग की गई है।

फिलहाल, वर्तमान एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जानी है। पुराने मामलों में भी अंतिम स्थिति संबंधित न्यायालयों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। केवल एफआईआर या शिकायत में किसी आरोप का दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है।

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