केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को लखनऊ में अपने पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है और परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो चुनाव मैदान में उतर सकती है। हालांकि, गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई करेगी।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि पहली बार रामविलास पासवान की जयंती उत्तर प्रदेश में मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य उनके विचारों को देश के हर कोने तक पहुंचाना और उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करना है।
अपने संबोधन में चिराग ने विकास, सामाजिक न्याय और युवाओं के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति या वर्ग की नहीं, बल्कि सर्वसमाज की राजनीति में विश्वास रखती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को जात-पात की राजनीति से ऊपर उठाकर विकास के रास्ते पर ले जाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

चिराग पासवान ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी समाज को जोड़ने और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति में विश्वास करती है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने पिता रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और संकल्पों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में संगठन का विस्तार करेगी और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी करेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान समर्थकों ने चिराग पासवान के समर्थन में नारे लगाए। उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण भारती ने भी दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरती है, तो उसका प्रभाव विशेष रूप से पूर्वांचल, दलित, अति पिछड़े और गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं वाले क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। वहीं, भाजपा के साथ संभावित गठबंधन या अलग चुनाव लड़ने की स्थिति में कई सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
