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BHU में विज्ञान भारती अधिवेशन में बोले सीएम योगी, विज्ञान और नवाचार से ही बनेगा विकसित भारत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आयोजित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। दो दिवसीय यह अधिवेशन 13 और 14 जून को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान का मूल उद्देश्य लोककल्याण है। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने विज्ञान और नवाचार को अपनाया, उन्होंने विकास के नए आयाम स्थापित किए। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत तक थी, लेकिन समय के साथ इसमें भारी गिरावट आई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का किसान केवल खेती तक सीमित नहीं था, बल्कि वह नवाचार और शोध का भी केंद्र था। उन्होंने कृषि, व्यापार और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को भारत की आर्थिक समृद्धि का आधार बताया। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति और विज्ञान का गहरा संबंध रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए ऑर्गेनिक और जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना के माध्यम से कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिली है। इससे उत्पादों की डिजाइन, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बेहतर हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसमें एमएसएमई सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और विज्ञान आधारित विकास को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर अधिवेशन का शुभारंभ किया तथा विज्ञान भारती की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बेड के अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। यह केंद्र बुजुर्गों के स्वास्थ्य उपचार, अनुसंधान और जराचिकित्सा सेवाओं के लिए उत्तर भारत का प्रमुख संस्थान बनेगा।

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