उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026’ ने डेयरी सेक्टर में राज्य की बढ़ती ताकत और संभावनाओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
दुग्धशाला विकास विभाग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम ने न केवल उपलब्धियों का उत्सव मनाया, बल्कि प्रदेश सरकार के उस विजन को भी सामने रखा, जिसमें डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी बनाने का लक्ष्य है।
महोत्सव में प्रदेशभर से करीब 10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों, उद्यमियों और निवेशकों ने भाग लिया। इस दौरान लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, जिससे राज्य में डेयरी उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया, जिसके माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोग इससे जुड़े।
139 लाभार्थियों को मिला डीबीटी का लाभ
कार्यक्रम में पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनीतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों और उद्यमियों को सम्मानित किया। साथ ही, वर्ष 2024-25 के नन्द बाबा पुरस्कार के तहत 139 लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तांतरित की गई।
‘गौ से ग्राहक तक’ मजबूत हो रही व्यवस्था
अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने स्वदेशी नस्ल के गोपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार बताया। वहीं दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य और स्थायी आय उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि ‘नन्द बाबा दुग्ध मिशन’ और ‘दुग्ध नीति-2022’ के माध्यम से उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है, जिससे गुणवत्तापरक दुग्ध उत्पादों का विस्तार हो रहा है।
25,000 करोड़ से अधिक के एमओयू, हजारों रोजगार
प्रदेश में डेयरी सेक्टर तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है। अब तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के 796 एमओयू किए जा चुके हैं, जिनसे 60,000 से ज्यादा रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के तहत 2,000 करोड़ रुपये की 72 परियोजनाएं शुरू की गईं, जबकि 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश प्रस्तावों से 13,000 अतिरिक्त रोजगार की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा ‘नन्द बाबा दुग्ध मिशन’ के तहत 10,000 से अधिक लाभार्थियों को 84 करोड़ रुपये की अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से दी गई है। 4,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए करीब 1.5 लाख दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा गया है।
नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी
महोत्सव में कई प्रमुख डेयरी कंपनियों—जैसे अमूल, पारस, ज्ञान और नमस्ते इंडिया—ने अपने स्टॉल लगाए, जहां आधुनिक तकनीक और नए उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। कुछ कंपनियों ने नए प्रोडक्ट भी लॉन्च किए, जिससे डेयरी सेक्टर में नवाचार को बढ़ावा मिला।
साथ ही, सहकारिता विभाग और सीएसए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने उन्नत नस्लों के पालन और तकनीकी सुधारों पर प्रस्तुति दी। लाभार्थियों ने भी अपने सफल मॉडल साझा कर अन्य पशुपालकों को प्रेरित किया।
