रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ।डिप्रेशन और नशे की बढ़ती लत मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। पढ़ाई का दबाव, कामकाज का तनाव, रिश्तों में परेशानियां और अकेलापन लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर IMA लखनऊ में आयोजित चर्चा में विशेषज्ञों ने डिप्रेशन, मोबाइल की लत और आत्महत्या की रोकथाम पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।
सीनियर साइकियाट्रिस्ट डॉ. शाश्वत सक्सेना ने कहा कि शारीरिक गतिविधियों में कमी, धूप न मिलना, सामाजिक मेलजोल कम होना और काम व निजी जिंदगी के बीच असंतुलन डिप्रेशन की समस्या बढ़ा सकते हैं।
मोबाइल पर घंटों सोशल मीडिया और गेमिंग में समय बिताने से नींद, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन का इलाज संभव है। आत्महत्या के विचारों पर खुलकर बात करना और प्रभावित व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
IMA लखनऊ की सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने नशा मुक्त भारत अभियान का समर्थन करते हुए बच्चों और युवाओं में गांजा व शराब के बढ़ते सेवन पर चिंता जताई। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर समाज की सोच बदलने और समय पर मदद लेने की जरूरत बताई।
IMA लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. मनोज अस्थाना ने कहा कि डिप्रेशन का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हार्मोन संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के समन्वित उपचार पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने अपील की कि मानसिक परेशानी को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद लें।
