काकोरी के शाहपुर भमरौली क्षेत्र में सड़क किनारे मिले बिजली विभाग के डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्सों के मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन बॉक्सों को कहां स्थापित किया जाना था, इन्हें सड़क किनारे किसने छोड़ा और इसके लिए जिम्मेदार कार्यदायी संस्था कौन है, इसकी जांच के लिए अमौसी जोन के मुख्य अभियंता राम कुमार ने दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) ब्रहम पाल की अध्यक्षता में गठित इस समिति को चार कार्य दिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में अधिशासी अभियंता भूपेंद्र और अधिशासी अभियंता ए.के. शुक्ला को शामिल किया गया है। जांच टीम यह भी पता लगाएगी कि डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स लगाने की जिम्मेदारी किस ठेकेदार या एजेंसी को सौंपी गई थी और वे सड़क किनारे कैसे पहुंच गए।
मामले को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि संबंधित अभियंता शुरू से ही सामग्री का नियमित रिकॉर्ड और निगरानी रखते, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। इससे विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
उधर, राजाजीपुरम के राम विहार कॉलोनी में एक मकान से मिले करीब 500 पुराने बिजली मीटरों की जांच भी तीसरे दिन तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुराने मीटरों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड विभाग के सॉफ्टवेयर में उपलब्ध है और उसकी जांच की जा रही है।
हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि जब इतने बड़े पैमाने पर पुराने मीटर एक निजी घर में रखे गए थे, तब संबंधित अधिकारी और अभियंता इससे अनजान कैसे रहे। क्या मीटर शाखा से जुड़े अधिकारियों द्वारा नियमित सुपरविजन नहीं किया जा रहा था? साथ ही विभाग के पास प्रतिदिन लगाए और हटाए जा रहे मीटरों का अद्यतन रिकॉर्ड है या नहीं, इस पर भी चर्चा तेज हो गई है।
जांच समिति का कहना है कि मुख्य कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है, लेकिन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
