Homeउत्तर प्रदेशत्योहारी सीजन में चीनी सस्ती, लेकिन अरहर दाल और चना महंगा; बढ़ी...

त्योहारी सीजन में चीनी सस्ती, लेकिन अरहर दाल और चना महंगा; बढ़ी रसोई की चिंता

रिपोर्ट: प्रिया बाजपेई शुक्ला

लखनऊ: त्योहारी सीजन में सरकार की सख्ती के चलते चीनी के दाम में राहत मिली है, लेकिन अरहर दाल और चने की कीमतों में तेजी ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले दो-तीन दिनों में ही अच्छी गुणवत्ता वाली अरहर दाल के दाम करीब 5 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। वहीं, चने की कीमतों में भी पिछले एक सप्ताह से तेजी बनी हुई है।

पांडेयगंज गल्ला मंडी के कारोबारी और व्यापारी नेता राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल के मुताबिक, पिछले दो-तीन दिनों में अरहर दाल के दाम में तेजी आई है। मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाली पुखराज अरहर दाल करीब 3 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। इसका थोक भाव पहले 116 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 118.50 रुपये प्रति किलो हो गया है।

फसल उत्पादन घटने से बढ़ी कीमत

कारोबारियों के मुताबिक, अरहर दाल की कीमत बढ़ने की एक वजह फसलों का धीरे-धीरे कम होता उत्पादन है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से अरहर दाल की आपूर्ति होती है। बाजार में बिक्री बढ़ने और माल की कमी होने पर कीमतों में तेजी आ जाती है।

वहीं, चने के दाम भी पिछले एक सप्ताह से बढ़े हुए हैं। मंडी में 66 रुपये किलो वाला चना बढ़कर 70 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह 69 रुपये किलो वाला चना भी महंगा हुआ है।

किराना कारोबारी संतोष गुप्ता ने बताया कि फुटकर बाजार में अरहर दाल का भाव 120 रुपये से बढ़कर 125 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं चना भी 80 से 85 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

चीनी के दाम में मिली राहत

दूसरी ओर, सरकार की सख्ती के बाद चीनी की कीमतों में गिरावट आई है। राजधानी के फुटकर बाजार में चीनी का भाव 64 रुपये से घटकर करीब 60 रुपये प्रति किलो हो गया है। थोक बाजार में भी कीमत 62 रुपये से घटकर 54 से 56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

कारोबारियों के अनुसार, करीब एक सप्ताह में चीनी के दाम में यह गिरावट आई है। इसकी बड़ी वजह सरकार की ओर से स्टॉक लिमिट को लेकर की गई सख्ती मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने 15 सितंबर से 30 नवंबर तक बड़े कारोबारियों के लिए चीनी की स्टॉक लिमिट 4000 क्विंटल से घटाकर 2000 क्विंटल कर दी है। इसके बाद बड़े कारोबारियों ने स्टॉक कम करना शुरू किया, जिससे थोक बाजार में चीनी के दाम तेजी से नीचे आए हैं।

हालांकि, फुटकर बाजार में इसका असर अभी सीमित है। ऐसे में त्योहारी सीजन में जहां चीनी खरीदने वालों को कुछ राहत मिली है, वहीं दाल और चने की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।

RELATED ARTICLES

Most Popular