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गोमतीनगर जमीन घोटाला: 300 करोड़ की फाइलों तक पहुंची ईडी, एलडीए अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

लखनऊ के गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार में भूमि समायोजन के नाम पर हुए कथित करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अर्जन विभाग से करीब 300 करोड़ रुपये से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों का रिकॉर्ड तलब किया है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच का फोकस दिवंगत दिलीप सिंह बाफिला से जुड़े लोगों के साथ-साथ उस समय के एलडीए अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भूमि समायोजन प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सरकारी नियमों को दरकिनार करते हुए किस तरह बड़े पैमाने पर जमीन हासिल की गई।

सहकारी समितियों के जरिए हासिल की गई थी जमीन

जांच में सामने आया है कि गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार में भूमि समायोजन की व्यवस्था का लाभ उठाकर कुछ सहकारी आवास समितियों ने निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक जमीन प्राप्त कर ली। आरोप है कि बाद में इन भूखंडों को बाफिला से जुड़े लोगों को बेहद कम कीमत पर आवंटित किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।

234 भूखंडों में मिली थीं गंभीर अनियमितताएं

वर्ष 2010 में तत्कालीन एलडीए उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल की जांच में हिमालय सहकारी आवास समिति और बहुजन निर्मल समिति के माध्यम से किए गए भूखंड आवंटन में व्यापक गड़बड़ियां उजागर हुई थीं। जांच रिपोर्ट में कुल 234 भूखंडों के समायोजन को संदिग्ध पाया गया था, जिनमें हिमालय समिति के 122 और बहुजन निर्मल समिति के 112 भूखंड शामिल थे।

आरोप यह भी हैं कि समितियों में परिवार और रिश्तेदारों को सदस्य बनाकर प्राइम लोकेशन पर बड़े-बड़े प्लॉट हासिल किए गए। शासन स्तर पर हुई जांच में भी फर्जी सदस्यों के नाम पर भूखंड आवंटन की पुष्टि हुई थी।

रिकॉर्ड की कमी ने बढ़ाई जांच की अहमियत

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बाफिला की वास्तविक कितनी जमीन अधिग्रहित की गई थी और उसके बदले कितनी भूमि समायोजन के तहत आवंटित की गई। सूत्रों का कहना है कि एलडीए के अर्जन विभाग के पास कई मामलों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

बाफिला पर दर्ज थे दो दर्जन से अधिक मुकदमे

दिलीप सिंह बाफिला के खिलाफ गोमतीनगर, चिनहट, विभूतिखंड और हजरतगंज समेत विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इससे पहले लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट उनकी 48.22 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी कर चुका है।

ईडी की सक्रियता के बाद अब इस बहुचर्चित भूमि घोटाले में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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