सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 15 अगस्त को हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
पहली हरियाली तीज मायके में क्यों मनाई जाती है?
भारतीय परंपरा के अनुसार, नवविवाहित बेटी अपनी पहली हरियाली तीज मायके में मनाती है। माना जाता है कि विवाह के बाद पहली तीज पर बेटी का मायके से भावनात्मक जुड़ाव बना रहे, इसलिए परिवार उसे सम्मानपूर्वक घर बुलाता है। इस अवसर पर उसे नए वस्त्र, श्रृंगार का सामान, घेवर, मिठाइयां और उपहार दिए जाते हैं। इस परंपरा को ‘सिंधारा’ या ‘सिंजारा’ कहा जाता है, जो बेटी के प्रति प्रेम, सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
राधा रानी से जुड़ी है परंपरा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज के अवसर पर राधा रानी अपनी ससुराल नंदगांव से मायके बरसाना आती हैं। इसी अवसर पर बरसाना में राधा-कृष्ण का झूलन महोत्सव भी मनाया जाता है। कहा जाता है कि नवविवाहित बेटियों के मायके आने की परंपरा इसी मान्यता से प्रेरित है।
शिव-पार्वती के मिलन का पर्व
हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सावन शुक्ल तृतीया के दिन उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से हरियाली तीज को शिव-पार्वती के मिलन और अखंड सौभाग्य के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
