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Kanpur-Lucknow Expressway: बारिश में फिर धंसी सड़क, 10 जगहों पर गड्ढे; लापरवाही पर सवाल

 रिपोर्ट – गोविंद कश्यप

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। रविवार को हुई बारिश के बाद असोहा और अचलगंज क्षेत्र में एक्सप्रेसवे करीब 10 जगहों पर धंस गया। कई स्थानों पर जलभराव होने से यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे पर लगातार सड़क धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

असोहा क्षेत्र में आठ जगह धंसी सड़क

बारिश के बाद असोहा क्षेत्र में कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली भारी वाहन लेन पर कई स्थानों पर पानी जमा हो गया। किलोमीटर 47.9 से 47.1 तक करीब 800 मीटर के हिस्से में जलभराव देखने को मिला। इसके अलावा किलोमीटर 46.6 से 46.3 तक करीब 300 मीटर सड़क पर भी पानी जमा रहा। तूरी के पास किलोमीटर 45.5 पर पूरी सड़क पर बरसाती पानी भरा नजर आया।

इसी तरह मेदपुर के पास किलोमीटर 44.4 से 44.1 तक सड़क के दबे हिस्से में पानी भरा रहा। कुदिकापुर के पास किलोमीटर 41.3 से 41 तक भी जलभराव की स्थिति बनी रही। किलोमीटर 42.2 पर कई जगह सड़क दबने के कारण पानी जमा हो गया।

नाली टूटी, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल

एक्सप्रेसवे पर जलभराव की एक बड़ी वजह जलनिकासी नालियों का क्षतिग्रस्त होना भी सामने आया। किलोमीटर 44.6 और 40.6 पर जलनिकासी की नाली टूट गई, जिसके चलते बारिश का पानी सड़क पर जमा हो गया। इससे सड़क के धंसने की समस्या और बढ़ गई।

स्थानीय स्तर पर लगातार सामने आ रही इन समस्याओं ने एक्सप्रेसवे की जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के पानी की निकासी के लिए पर्याप्त और मजबूत इंतजाम नहीं होने से सड़क के नीचे पानी जाने और सड़क के कमजोर होने की आशंका बढ़ रही है।

अचलगंज में भी सड़क धंसी

असोहा के अलावा अचलगंज क्षेत्र में भी किलोमीटर 62 और 63 के पास सड़क धंसी हुई मिली। यहां भी बारिश के बाद सड़क की स्थिति खराब नजर आई। लगातार अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाओं से एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर बार-बार सड़क धंसने और जलभराव की घटनाएं सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थायी मरम्मत कब तक होती है।

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