Homeउत्तर प्रदेशUP : फर्जी डिग्री से वकालत! 26 वकीलों पर FIR

UP : फर्जी डिग्री से वकालत! 26 वकीलों पर FIR

 रिपोर्ट – गोविंद कश्यप

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में बार काउंसिल में पंजीकरण के लिए जमा किए गए शैक्षिक दस्तावेजों में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराकर वकालत करने के आरोप में 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। बार काउंसिल के स्तर से कराए गए सत्यापन में इन अधिवक्ताओं की डिग्री और अंकपत्र फर्जी पाए जाने का दावा किया गया है। मामले में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामने आया मामला

एफआईआर के मुताबिक, पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है। कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य मामले में हाईकोर्ट ने 3 जून 2026 को आदेश पारित किया था। इस मामले में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत एक अधिवक्ता की डिग्री सत्यापन के दौरान फर्जी पाए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बार काउंसिल ने शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसी दौरान कई अधिवक्ताओं की डिग्री और अंकपत्रों को संबंधित विश्वविद्यालयों के पास भेजकर उनकी वास्तविकता की जांच कराई गई।

विश्वविद्यालयों से सत्यापन में खुली दस्तावेजों की पोल

जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालयों से इन शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। बताया गया है कि विश्वविद्यालयों ने कई डिग्री और अंकपत्रों को अपने यहां से जारी किए जाने की पुष्टि नहीं की। इसके बाद दस्तावेजों के फर्जी होने की बात सामने आई।

बार काउंसिल के सत्यापन में 26 अधिवक्ताओं के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले ने बार काउंसिल में पंजीकरण के दौरान दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

करीब 100 लोगों के दस्तावेज जांच के घेरे में

मामला अभी 26 अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक करीब 100 लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी गई है। इन सभी के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराई गई है। जांच में कई अंकपत्र और डिग्री फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराने पर भी इन दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हुई।

अब पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि कथित फर्जी डिग्री और अंकपत्र कहां से हासिल किए गए।

फर्जी डिग्री कहां से मिली? पुलिस खंगालेगी नेटवर्क

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि विश्वविद्यालयों द्वारा अपने यहां का नहीं बताए गए दस्तावेज संबंधित अधिवक्ताओं तक कैसे पहुंचे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फर्जी डिग्री और अंकपत्र तैयार करने, छापने या उपलब्ध कराने में किसी व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है।

पुलिस दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के साथ संबंधित अधिवक्ताओं से पूछताछ भी कर सकती है। इसके अलावा दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और कथित तौर पर उन्हें उपलब्ध कराने वालों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। करीब 100 लोगों के दस्तावेज जांच के दायरे में होने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए, इन्हें किसने उपलब्ध कराया और इस पूरे मामले के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।

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