सावन में कांवड़ यात्रा के आगाज़ के साथ उत्तर प्रदेश पूरी तरह शिवमय हो गया है।
प्रदेशभर के शिवालयों में घंटियों की गूंज और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से भक्तिमय माहौल बना हुआ है। हरिद्वार, कछला घाट और गंगोत्री से गंगाजल लेकर निकले कांवड़िए अपने-अपने शिव मंदिरों की ओर बढ़ रहे हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं।
प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों के साथ-साथ छोटे कस्बों के प्राचीन शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। कांवड़ यात्रा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, अनुशासन और सांस्कृतिक परंपरा का भी प्रतीक बन चुकी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस प्रशासन 19 बिंदुओं पर धर्मगुरुओं और स्थानीय लोगों से लगातार संवाद कर रहा है।
कांवड़ मार्गों पर सुरक्षा, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था, सेवा शिविर और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
कांवड़ यात्रा का असर बाजारों में भी साफ दिखाई दे रहा है। महादेव के स्लोगन वाली टी-शर्ट, भगवा गमछे, पूजन सामग्री, सजावटी कलश और अन्य धार्मिक सामान की बिक्री तेज हो गई है।
व्यापारियों के अनुसार इस बार कांवड़ यात्रा से प्रदेश में करीब 1500 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है, जबकि अकेले मेरठ में लगभग 300 करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है।
