न्यूज़ डेस्क, लखनऊ
लखनऊ स्थित केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी जल्द दूर होने की उम्मीद है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए 16 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। डॉक्टरों ने नौकरी ज्वाइन करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि करीब एक सप्ताह के भीतर सभी डॉक्टर अपनी ड्यूटी संभाल लेंगे।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में 400 से अधिक बेड हैं, जबकि कैजुअल्टी में 44 बेड की व्यवस्था है। यहां रोजाना 250 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कैजुअल्टी के ज्यादातर बेड लगातार भरे रहते हैं। कई बार बेड उपलब्ध नहीं होने पर गंभीर मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर ही करना पड़ता है।
ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह के मुताबिक, यहां प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गंभीर मरीज पहुंचते हैं। सड़क हादसे, गंभीर चोट और अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों की उपचार व्यवस्था पर पड़ता है।

16 डॉक्टरों के आने से बढ़ेगी रेजिडेंट की संख्या
डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों की जांच, निगरानी और इलाज शुरू करने में अतिरिक्त समय लग जाता है। अब 16 नए जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के आने के बाद कैजुअल्टी में रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या करीब 42 हो जाएगी। इससे गंभीर मरीजों की जांच और इलाज में तेजी आने की उम्मीद है।
डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि कैजुअल्टी में मरीजों को प्राथमिक उपचार और जरूरी जांच के बाद संबंधित विभागों के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों की जांच और उपचार समय पर हो सकेगा। इससे मरीजों को संबंधित वार्ड में जल्द शिफ्ट करने में भी मदद मिलेगी।
कैजुअल्टी में बेड खाली होने की उम्मीद
मरीजों को समय पर संबंधित विभागों में शिफ्ट किए जाने से कैजुअल्टी पर लगातार बढ़ रहा दबाव कम हो सकता है। इससे नए मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी।
केजीएमयू प्रशासन को उम्मीद है कि 16 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती के बाद कैजुअल्टी में इलाज की व्यवस्था और बेहतर होगी और गंभीर मरीजों को शुरुआती जांच व उपचार के लिए ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
