रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ।राजधानी लखनऊ में समान वेतन और बकाया एरियर की मांग को लेकर बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टरों ने शुक्रवार को 1090 चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 2018, 2019 और 2020 बैच के डॉक्टरों ने वेतन में कथित असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टर सफेद एप्रन और गले में स्टेथोस्कोप पहनकर पहुंचे। कई डॉक्टरों ने मुंह पर टेप लगाकर और हाथों में तख्तियां लेकर अपना विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद डॉक्टर सड़क पर धरने पर बैठ गए। स्थिति संभालने के लिए हजरतगंज के एसीपी ने भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और शांति बनाए रखने के साथ रास्ता खाली करने की अपील की।
40 दिनों से आंदोलन, शासनादेश का इंतजार
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले करीब 40 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि 2 सितंबर को उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने उनकी मांगों पर कार्रवाई करने और 24 घंटे के भीतर शासनादेश जारी कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद आदेश जारी नहीं होने से उनमें नाराजगी है।
डॉक्टरों ने हाथों में ‘वन बॉन्ड, वन सैलरी’ और ‘बॉन्डेड मेडिकल अधिकारियों को न्याय दो’ जैसी तख्तियां लेकर समान वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की।
50-55 हजार और 1.10 लाख रुपये वेतन का अंतर
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो साल तक अनिवार्य सेवा देनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की शर्त का सामना करना पड़ता है। इस दौरान कई डॉक्टरों को दूरदराज के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर तैनात किया जाता है। डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें इसके बदले करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है।
वहीं, उनके अनुसार समान एमबीबीएस योग्यता और बॉन्ड व्यवस्था के तहत दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल रहा है। इसी अंतर को लेकर डॉक्टरों ने समान वेतनमान लागू करने और पुराने बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग की।
‘हक के लिए अधिकारियों के पैरों में गिरना पड़ रहा’
देवरिया से प्रदर्शन में पहुंचीं डॉ. निदा और मिर्जापुर से आए डॉ. अक्षय ने अपनी समस्याएं सामने रखीं। डॉ. अक्षय ने कहा कि दूर-दराज के जिलों से सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके राजधानी आना पड़ता है, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि समाज डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देता है, लेकिन अपने जायज अधिकारों के लिए उन्हें अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।
पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन और यातायात बाधित होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हालांकि, डॉक्टर अपनी मांगों पर लिखित शासनादेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात पर अड़े रहे।
