राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित एक कथित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पर पुलिस की छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। साइबर सेल और साइबर थाना की संयुक्त कार्रवाई में 119 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि मौके से 100 लैपटॉप, 178 मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण व दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, “सोलारिस सॉल्यूशन” नाम से संचालित यह कॉल सेंटर मुख्य रूप से शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक सक्रिय रहता था। यहां से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर कथित साइबर ठगी की जाती थी।
5 राउंड इंटरव्यू के बाद मिलती थी नौकरी
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर में भर्ती के लिए पांच चरणों में इंटरव्यू लिया जाता था। कर्मचारियों को 25 से 28 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा, कथित ठगी से प्राप्त रकम पर 10 प्रतिशत तक इंसेंटिव भी दिया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इसी लालच में कई कर्मचारी इस नेटवर्क से जुड़े थे।
विदेशी नागरिकों को बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन रिफंड और कस्टमर सपोर्ट के नाम पर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। गूगल पर सहायता खोजने वाले लोगों तक पहुंचकर उन्हें झांसे में लिया जाता और विभिन्न प्रक्रियाओं के बहाने बैंकिंग जानकारी हासिल कर कथित तौर पर उनके खातों से रकम निकाल ली जाती थी।
ऑपरेशन मैनेजर हिरासत में
छापेमारी के दौरान अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को हिरासत में लिया गया। दोनों कॉल सेंटर में ऑपरेशन मैनेजर के रूप में कार्यरत बताए जा रहे हैं। पुलिस उनके माध्यम से पूरे नेटवर्क और इसके सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
200 करोड़ से अधिक की ठगी की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस नेटवर्क ने विदेशी नागरिकों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की हो सकती है। हालांकि, इस रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करा रही है और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कॉल सेंटर के लिए समिट बिल्डिंग की दो मंजिलें किराये पर ली गई थीं और किराये समेत संचालन पर सालाना करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे।
