लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोलागंज स्थित बारूदखाना इलाके में छह मंजिला एसए अपार्टमेंट को अब ध्वस्त किया जाएगा। एक पिलर टूटने के बाद खतरनाक स्थिति में पहुंची इस बिल्डिंग को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच में रहने के लिए असुरक्षित पाया गया है। करीब 3 हजार वर्गफीट जमीन पर बने इस अपार्टमेंट में कुल 24 फ्लैट हैं।
एलडीए अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डिंग की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि इसकी मरम्मत कराना संभव नहीं है। साथ ही निर्माण में हुए अवैध हिस्से का शमन भी नहीं कराया जा सकता। ऐसे में पूरे अपार्टमेंट को ध्वस्त करना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
एलडीए की ओर से बिल्डर को अब नया नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस में उसे अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इस अवधि में यदि बिल्डर खुद अपार्टमेंट को ध्वस्त नहीं करता है तो समय सीमा पूरी होने के बाद एलडीए अपने स्तर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में बिल्डिंग के अवैध निर्माण का शमन कराने का विकल्प नहीं दिया जाएगा। जांच में बिल्डिंग की स्थिति रहने के लिए सुरक्षित नहीं पाए जाने के बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
पिलर टूटने के बाद मची थी अफरा-तफरी
एसए अपार्टमेंट में गत सोमवार सुबह अचानक तेज आवाज के साथ एक पिलर टूट गया था। पिलर टूटने के बाद बिल्डिंग में कंपन महसूस होने लगा और वहां रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने परिवार के साथ आनन-फानन में बाहर निकल आए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बिल्डिंग की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को भी बुलाया गया। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को मौके पर बुलाकर स्थिति का जायजा लिया गया।
सुरक्षा के लिहाज से अपार्टमेंट में रहने वाले करीब 25 परिवारों को बाहर निकाल दिया गया। इसके साथ ही आसपास का करीब 50 मीटर क्षेत्र सील कर दिया गया। पास में स्थित एक अन्य बिल्डिंग को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया।
राहत की बात यह रही कि पिलर टूटने के समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।
बिल्डिंग को संभालने के लिए लगाए जा रहे जैक
बिल्डिंग के अचानक ढहने के खतरे को देखते हुए एलडीए ने इसे अस्थायी रूप से सहारा देने का काम शुरू कराया है। इसके लिए विशेष टीम भूतल पर काम कर रही है। जहां दीवार बनी हुई है, वहां छत और दीवार के बीच जैक लगाए जा रहे हैं।
वहीं, जिन स्थानों पर खुला हिस्सा है, वहां मोटी दीवार बनाकर उसके सहारे जैक लगाने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के मुताबिक अब तक 100 से अधिक जैक लगाए जा चुके हैं। बिल्डिंग को सुरक्षित तरीके से संभालने के लिए 200 से अधिक जैक लगाए जाने की जरूरत पड़ सकती है।
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि जैक और अन्य सपोर्ट सिस्टम लगाने के बाद बिल्डिंग के अचानक ढहने का खतरा कम किया जाएगा। इसके बाद फ्लैट मालिकों को अंदर जाकर अपना जरूरी सामान निकालने की अनुमति दिए जाने पर विचार किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ महीने का समय लगने की संभावना जताई जा रही है।
2009 में पास हुआ था नक्शा, 2011 में तैयार हुआ अपार्टमेंट
एलडीए की जांच के अनुसार एसए अपार्टमेंट का नक्शा वर्ष 2009 में पास हुआ था। इसके बाद बिल्डर वकील अहमद ने शहाबुद्दीन के साथ मिलकर वर्ष 2011 में अपार्टमेंट का निर्माण कराया था।
जांच में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए हैं। निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों के पालन को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इससे पहले एलडीए ने अपार्टमेंट की छत पर बनाए जा रहे अवैध पेंटहाउस को गिराने का आदेश दिया था।
हालांकि अब पिलर टूटने और पूरी बिल्डिंग की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एलडीए ने पूरे अपार्टमेंट को ही ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।
निर्माण के दौरान तैनात अधिकारियों की भी होगी जांच
एसए अपार्टमेंट के निर्माण और उससे जुड़े अवैध निर्माण के मामले में एलडीए के तत्कालीन अभियंताओं और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। एलडीए उपाध्यक्ष ने संबंधित जोनल अधिकारी से उस समय तैनात रहे अधिकारियों और अभियंताओं की सूची मांगी है।
सूची मिलने के बाद यह देखा जाएगा कि अपार्टमेंट के निर्माण के दौरान मानकों का पालन कराने में किस स्तर पर लापरवाही हुई और अवैध निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई की गई थी। इसके आधार पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही जा रही है।
बिल्डर का कार्यालय बंद, अभी FIR नहीं
मामले में बिल्डर का फिलहाल कोई सुराग नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि उसका कार्यालय भी बंद है और वहां काम करने वाले कर्मचारी भी सामने नहीं आए हैं।
वहीं, अभी तक किसी फ्लैट मालिक की ओर से पुलिस को लिखित तहरीर नहीं दी गई है। एलडीए के मुताबिक, फ्लैट मालिक बिल्डर से अपने नुकसान की भरपाई की मांग कर सकते हैं।
एलडीए अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपार्टमेंट ध्वस्त होने की स्थिति में फ्लैट मालिकों को विस्थापित मानते हुए प्राधिकरण की ओर से वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। फिलहाल पूरा मामला एलडीए की जांच और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई के केंद्र में है।
