लखनऊ में गोमती बैराज के जर्जर गेटों को बदलने का काम शुरू होने जा रहा है। इसके चलते बैराज ब्रिज को 7 मई से 15 जून तक करीब डेढ़ महीने के लिए बंद रखा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इस संबंध में ट्रैफिक पुलिस को पत्र भेजकर डायवर्जन लागू करने की मांग की है।
हाईटेक बनेगा बैराज
बैराज को अब आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। गंगा बैराज की तर्ज पर यहां मैन्युअल सिस्टम की जगह कंप्यूटराइज्ड कंट्रोल सिस्टम लागू होगा। इसके तहत एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से सभी गेट एक क्लिक पर खोले और बंद किए जा सकेंगे। इस परियोजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पुरानी व्यवस्था से मिलेगी राहत
फिलहाल गेटों का संचालन पूरी तरह मैन्युअल है, जिसमें ऑपरेटर को प्लेटफॉर्म पर चढ़कर एक-एक गेट खोलना-बंद करना पड़ता है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और जोखिम भरी होती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी गेट मोटरों के जरिए केंद्रीकृत सिस्टम से संचालित होंगे।
कई गेट हो चुके हैं पुराने
सिंचाई विभाग के अनुसार, बैराज के 9 गेट अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं। इनमें से 2 गेट लगभग बदल चुके हैं, जबकि 4 गेटों को बदलने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा चुकी है। गेट बदलने के काम पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसलिए बंद रहेगा ब्रिज
भारी मशीनों की आवाजाही, मरम्मत कार्य और सुरक्षा कारणों से बैराज ब्रिज पर ट्रैफिक रोकना जरूरी है। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था करेगी, ताकि लोगों को कम से कम असुविधा हो।
बाढ़ प्रबंधन होगा बेहतर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए गेट और कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से गोमती नदी के जल प्रबंधन में बड़ा सुधार होगा। बारिश के समय जलस्तर बढ़ने पर गेट तुरंत खोले जा सकेंगे, जिससे शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या कम होगी। साथ ही निगरानी और संचालन भी ज्यादा तेज और सटीक होगा।
