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लखनऊ में पिंक वेव-2026 वॉकथॉन, 500 से ज्यादा महिलाओं ने दिया ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता का संदेश

रिपोर्ट – प्रिया बाजपेई शुक्ला

लखनऊ। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को एसजीपीजीआई की ओर से ‘पिंक वेव-2026’ वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इसमें 500 से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया। पिंक ड्रेस, पिंक कैप और रिबन लगाए प्रतिभागियों ने वीमेन पावर लाइन 1090 चौराहे से फूड वैली और समता मूलक चौराहे होते हुए दोबारा वीमेन पावर लाइन चौराहे तक पैदल मार्च किया।

वॉकथॉन में महिलाओं के साथ छात्राएं, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हुए। आयोजन का उद्देश्य स्तन कैंसर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर जांच व उपचार के प्रति महिलाओं को प्रोत्साहित करना रहा।

विंटेज कारों ने खींचा लोगों का ध्यान

कार्यक्रम के दौरान विंटेज कार रैली भी निकाली गई। एक दर्जन से ज्यादा पुरानी और आकर्षक कारों ने शहर में जागरूकता का संदेश दिया। ‘Drive the Message Through Lucknow’ थीम के साथ निकली इस रैली में शामिल चमचमाती विंटेज कारें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

रैली में शामिल एक पुरानी शेवरले कार को लेकर खास उत्सुकता देखने को मिली। यह वही कार बताई गई जिसे फिल्म ‘गदर’ की शूटिंग के दौरान अभिनेता अमरीश पुरी के किरदार से जुड़े दृश्यों में इस्तेमाल किया गया था। लोगों ने कारों के साथ सेल्फी ली और उनके इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की।

75 साल पुरानी कार को रखना बड़ी चुनौती

रैली में शामिल करीब 75 साल पुरानी मॉरिस ब्रिटिश कार भी आकर्षण का केंद्र रही। ऐसी विंटेज कारों को सुरक्षित और चालू हालत में रखना काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इनके रखरखाव के लिए नियमित रूप से इंजन और दूसरे हिस्सों की जांच करनी पड़ती है।

पुरानी कारों के कई पार्ट्स अब आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ महत्वपूर्ण पार्ट्स विदेश से मंगवाने पड़ते हैं। रैली में शामिल लोगों ने इसी उदाहरण के जरिए कैंसर से लड़ने का संदेश भी दिया कि जिस तरह पुरानी कारों का रखरखाव मुश्किल होने के बावजूद संभव है, उसी तरह कैंसर के खिलाफ भी हिम्मत और सही उपचार के साथ लड़ाई लड़ी जा सकती है।

समय पर जांच से इलाज की संभावना बेहतर

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर की नियमित जांच और शुरुआती स्तर पर पहचान के महत्व पर जोर दिया। महिलाओं को नियमित रूप से सेल्फ एग्जामिनेशन करने और किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर बीमारी की पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित मैमोग्राफी जांच को भी महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यक्रम के जरिए महिलाओं से अपील की गई कि वे स्तन कैंसर को लेकर जागरूक रहें और किसी भी संदेह की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।

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