रिपोर्ट: प्रिया बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। 6900 शिक्षक भर्ती से लेकर फार्मासिस्ट भर्ती तक अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कई जगह स्कूल के छात्र भी अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन और चक्का जाम कर चुके हैं।
इसी बीच अब लखनऊ विश्वविद्यालय से भी एक मामला सामने आया है, जहां राजनीति शास्त्र विभाग के शोध छात्र महेंद्र कुमार ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

शोध छात्र महेंद्र कुमार का आरोप है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में जातिवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी पर विश्वविद्यालय के माहौल को जातिवाद और संघ से प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी पर क्या आरोप लगाए?
महेंद्र कुमार के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों में असंतोष है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय में सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा और कथित तौर पर जातिगत आधार पर भेदभाव को बढ़ावा मिल रहा है।
शोध छात्र ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों का केंद्र होने के बजाय राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी को हटाने की मांग करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन या प्रॉक्टर की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
6900 शिक्षक भर्ती से फार्मासिस्ट भर्ती तक क्यों हो रहे प्रदर्शन?
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय से शिक्षा और सरकारी भर्ती से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। 6900 शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थी अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, फार्मासिस्ट भर्ती में सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर भी अभ्यर्थी लखनऊ पहुंचे और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की।
इसके अलावा अलग-अलग जिलों में स्कूल और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों के प्रदर्शन की खबरें भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में सड़क पर चक्का जाम तक की स्थिति बनी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय का मामला क्यों अहम?
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। ऐसे में विश्वविद्यालय के भीतर जातिवाद और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों ने एक बार फिर छात्रों की शिकायतों के निस्तारण और कैंपस के माहौल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शोध छात्र महेंद्र कुमार की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी को बर्खास्त करने की मांग भी उठाई है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
एक ओर जहां यूपी में शिक्षक और फार्मासिस्ट भर्ती को लेकर अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्रों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों और अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण उन्हें धरना-प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है?
फिलहाल, लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला चर्चा में है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और मामले में होने वाली संभावित जांच पर है।
