मानसून का मौसम भीषण गर्मी से राहत जरूर दिलाता है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अधिक नमी, जलभराव और दूषित पानी के कारण डेंगू, मलेरिया, वायरल संक्रमण के साथ-साथ लिवर से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से फैल सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में दूषित भोजन और पानी के सेवन से हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, जो आगे चलकर पीलिया (जॉन्डिस) का कारण बन सकता है।
साफ और सुरक्षित पानी पिएं
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में सबसे जरूरी है कि केवल साफ, फिल्टर किया हुआ या उबला हुआ पानी ही पिएं। बाहर मिलने वाले जूस, बर्फ या खुले पेय पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें दूषित पानी का इस्तेमाल हो सकता है।
दूषित पानी के कारण हैजा, टाइफाइड, डायरिया और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। वर्ष 2016 में शिमला में दूषित पेयजल के कारण पीलिया का बड़ा प्रकोप सामने आया था, जिसमें 1,600 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे। इसलिए पीने के पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
ताजा और स्वच्छ भोजन करें
मानसून के दौरान हमेशा ताजा और गर्म भोजन खाने की सलाह दी जाती है। बासी, ठंडा या अधपका भोजन संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञ स्ट्रीट फूड जैसे चाट, गोलगप्पे, कटे हुए फल और खुले सलाद खाने से बचने की सलाह देते हैं। फल और सब्जियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना भी जरूरी है।
व्यक्तिगत स्वच्छता का रखें ध्यान
लिवर संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन करने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं। टूथब्रश, रेजर या ऐसी कोई भी वस्तु साझा न करें जो मुंह या खून के संपर्क में आती हो। घर और आसपास की साफ-सफाई बनाए रखने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पीलिया के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
यदि मानसून के दौरान नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—
- भूख कम लगना
- बार-बार उल्टी आना
- लगातार थकान महसूस होना
- बुखार आना
- पेशाब का रंग गहरा होना
- मल का रंग हल्का या पीला होना
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
- पेट में दर्द
- फ्लू जैसे लक्षण
- शरीर में खुजली
- तेजी से वजन घटना
समय पर इलाज है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि पीलिया के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। मानसून में सुरक्षित पानी, स्वच्छ भोजन और व्यक्तिगत साफ-सफाई अपनाकर लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है और हेपेटाइटिस A एवं E जैसे संक्रमणों से बचाव संभव है।
