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मोतिहारी में कथित जाली नोट और ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, चार हिरासत में; करोड़ों की बरामदगी की जांच जारी

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित भोपतपुर गांव में पुलिस ने मंगलवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित जाली नोट और ठगी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने सुलेमान अंसारी और इम्तियाज के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर चार लोगों को हिरासत में लिया। देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हलचल मच गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह अभियान सदर-1 एवं सदर-2 के एसडीपीओ जितेश पांडेय के नेतृत्व में चलाया गया। ऑपरेशन में दो प्रशिक्षु डीएसपी, पांच थानों की पुलिस, जिला आसूचना इकाई (DIU) और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। टीम ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाकर संदिग्ध सामान जब्त किया।

सूत्रों का दावा है कि छापेमारी के दौरान करीब एक करोड़ रुपये के कथित जाली नोट, 13 लाख रुपये नकद, 38 सोने के बिस्किट (फाइन व रोल गोल्ड), हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन और एक वाहन बरामद किए गए हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन बरामदगियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। बरामद नोटों और सोने की वैधता की जांच विशेषज्ञों की मदद से कराई जा रही है।

ऐसे लोगों को बनाते थे शिकार

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी लोगों को लालच देते थे कि 5 हजार रुपये देने पर बदले में 15 हजार रुपये के जाली नोट दिए जाएंगे, जिन्हें बाजार में आसानी से चलाया जा सकता है। विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में कथित तौर पर असली नोट दिए जाते थे। जब पीड़ित का भरोसा बन जाता, तब उससे बड़ी रकम लेकर नकली नोटों की गड्डी थमा दी जाती।

सूत्रों के मुताबिक, इन गड्डियों में ऊपर और नीचे असली नोट लगाए जाते थे, जबकि बीच में ‘Children Bank’ लिखे नकली नोट रखे जाते थे। पैकिंग इतनी सटीक होती थी कि पहली नजर में पूरी गड्डी असली दिखाई देती थी।

फर्जी पुलिस बनकर करते थे लूट

जांच में यह भी सामने आया है कि यदि कोई व्यक्ति पांच लाख रुपये या उससे अधिक की डील के लिए पहुंचता था तो उसे सुनसान स्थान पर बुलाया जाता था। वहां पहले से मौजूद गिरोह के सदस्य पुलिस की वर्दी पहनकर छापेमारी का नाटक करते और रकम जब्त करने के नाम पर पीड़ित से पैसे छीन लेते थे। अवैध सौदे में शामिल होने के डर से अधिकांश पीड़ित पुलिस में शिकायत भी नहीं करते थे।

बड़े नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

छापेमारी के दौरान हथियार और कारतूस मिलने की सूचना के बाद पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के तार किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क या दूसरे राज्यों से तो नहीं जुड़े हैं। बरामद मोबाइल फोन, वाहन और अन्य दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।

एसडीपीओ जितेश पांडेय ने कहा कि जांच अभी जारी है और बरामद सामान की पुष्टि के बाद पूरे मामले का खुलासा प्रेस वार्ता के माध्यम से किया जाएगा। फिलहाल हिरासत में लिए गए चारों लोगों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस को कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

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