Homeउत्तर प्रदेशनाग पंचमी 17 अगस्त को, सोमवार के दिन बन रहा विशेष संयोग

नाग पंचमी 17 अगस्त को, सोमवार के दिन बन रहा विशेष संयोग

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार** को मनाई जाएगी।

पंचमी तिथि का आरंभ 16 अगस्त को दोपहर 4:52 बजे होगा और इसका समापन 17 अगस्त को शाम 5:00 बजे होगा। नाग पंचमी पर पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त **सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक रहेगा।

हिंदू धर्म में नागों और सर्पों का विशेष महत्व माना गया है। भगवान शिव अपने गले में सर्प धारण करते हैं, जबकि भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर विराजमान होते हैं। नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ सर्पों की अधिष्ठात्री देवी **मनसा देवी** की भी पूजा की जाती है।

ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ के अनुसार नाग पंचमी का दिन राहु-केतु और कालसर्प दोष की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष में राहु को सर्प का सिर और केतु को सर्प की पूंछ माना गया है। इस दिन राहु के मंत्र ॐ रां राहवे नम और केतु के मंत्र“ॐ कें केतवे नमः का जाप करने की सलाह दी जाती है।

उन्होंने बताया कि नाग पंचमी पर शिवलिंग पर भांग-धतूरा अर्पित करने तथा आठमुखी और नौमुखी रुद्राक्ष धारण करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा से पितृदोष की शांति और संतान संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

नाग पंचमी के दिन घर की दीवारों पर नाग की आकृति बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर इस दिन सर्पों को दूध अर्पित कर नाग देवता की पूजा की जाती है।

गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा

नाग पंचमी के अवसर पर कुछ क्षेत्रों में गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन कन्याएं गुड़िया बनाती हैं और चौराहे पर भाई इन गुड़ियों को डंडे से पीटते हैं। यह परंपरा स्थानीय लोक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।

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