देशभर में सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) की रोकथाम, समय पर पहचान, मानकीकृत उपचार और प्रभावी प्रबंधन के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समूह राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित गाइडलाइन तैयार करेगा। इन दिशानिर्देशों के लागू होने से पूरे देश में COPD मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी बन सकेंगी।
तकनीकी विशेषज्ञ समूह के सदस्य डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि भारत में करीब 6 करोड़ लोग COPD से पीड़ित हैं, जबकि हर वर्ष लगभग 5 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। उन्होंने कहा कि COPD देश में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है और तेजी से गंभीर श्वसन रोग के रूप में उभर रही है। इसलिए इसके प्रभावी नियंत्रण और बेहतर उपचार व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत गाइडलाइन की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
डॉ. सूर्यकांत ने विश्वास जताया कि नई राष्ट्रीय गाइडलाइन चिकित्सकों को वैज्ञानिक और मानकीकृत उपचार पद्धति उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोग की समय पर पहचान, बेहतर प्रबंधन और मृत्यु दर कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे देशभर के लाखों COPD मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और समान स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
