रिपोर्ट – अचल प्रताप सिंह
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी PM सूर्य घर योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि जिन लोगों ने कभी आवेदन ही नहीं किया, उनके नाम पर सरकारी सब्सिडी निकाल ली गई। इतना ही नहीं, कुछ मृत व्यक्तियों को भी लाभार्थी दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मामले में यूपीनेडा की शिकायत पर वेंडर के खिलाफ कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
यूपीनेडा के वरिष्ठ लिपिक रघुवर दयाल ने बताया कि सचिव एवं मुख्य परियोजना अधिकारी के निर्देश पर सनराइज एंटरप्राइजेज की जांच कराई गई। जांच के दौरान फर्म के प्रोपराइटर आशु गुप्ता की भूमिका संदिग्ध मिली। इसके बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि फर्म द्वारा तैयार किए गए 29 रूफटॉप सोलर आवेदनों में से 9 आवेदनों की मौके पर जांच की गई। इनमें 8 लाभार्थी पूरी तरह फर्जी पाए गए, जबकि केवल एक स्थान पर ही सोलर सिस्टम स्थापित मिला। इससे योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है।
मृतकों और अनजान लोगों के नाम पर निकाली गई सब्सिडी
यूपीनेडा की जांच में खुलासा हुआ कि कुछ मामलों में मृत व्यक्तियों को लाभार्थी दिखाकर सब्सिडी ली गई, जबकि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी भुगतान कर दिया गया जिन्होंने कभी आवेदन ही नहीं किया था और उनके घरों पर कोई सोलर पैनल भी नहीं लगाया गया।
आरोप है कि आरोपी वेंडर ने फर्जी मोबाइल नंबर, कूटरचित आवेदन पत्र, दस्तावेजों में हेरफेर और चेक में बदलाव कर सरकारी सब्सिडी विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। जांच में वित्तीय लेन-देन भी संदिग्ध पाया गया है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
यूपीनेडा का मानना है कि बैंक स्तर पर सहयोग के बिना इस तरह की वित्तीय अनियमितता संभव नहीं थी। इसलिए पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की भी जांच करेगी।
कैंट थाना पुलिस ने यूपीनेडा की तहरीर पर आशु गुप्ता के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान यदि किसी बैंक कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
