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आउटसोर्स कर्मियों की नहीं हुई छंटनी, सुरक्षा पर 28.30 करोड़ खर्च: पावर कॉरपोरेशन

लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा और मानवीय जीवन की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रबंधन ने कुछ संगठनों द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा में लापरवाही और उनकी छंटनी किए जाने की बात कही गई थी।

पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (प्रबंधन एवं प्रशासन) डॉ. जान मथाई ने बताया कि कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा उपकरणों की खरीद और उपलब्धता पर 28.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से सब-स्टेशन ऑपरेटरों, लाइनमैनों और रखरखाव कार्यों में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण मॉड्यूल लागू किए गए हैं तथा विभिन्न संस्थागत उपायों के जरिए विद्युत दुर्घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पिछले वर्ष की तुलना में विद्युत दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 31 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। साथ ही तुलनात्मक रूप से 32 आउटसोर्स कर्मियों की जान बचाने में सफलता मिली है।

डॉ. मथाई ने दोहराया कि कॉरपोरेशन द्वारा किसी भी आउटसोर्स कर्मी की छंटनी नहीं की गई है और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

तबादला सत्र बढ़ाने की मांग

इस बीच, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश में भीषण गर्मी के दौरान लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए स्थानांतरण सत्र 2026-27 की अवधि बढ़ाने की मांग उठाई है। समिति का कहना है कि वर्तमान समय में निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए अनुभवी अभियंताओं और कर्मचारियों की आवश्यकता है।

समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने भी यह स्वीकार किया है कि विद्युत लाइनों और उपकरणों के बेहतर अनुरक्षण, फॉल्ट्स को तत्काल दूर करने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए अनुभवी कर्मियों की तैनाती जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने तबादलों की निर्धारित अंतिम तिथि 31 मई से बढ़ाकर 15 जुलाई किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है कि संविदा कर्मचारियों की छंटनी और उन्हें कार्यमुक्त किए जाने से संबंधित निर्णयों को वापस लिया जाए, ताकि बिजली व्यवस्था प्रभावित न हो और कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जा सके।

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