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16 वर्षीय प्रणव मित्तल की अनोखी पहल, 30 से अधिक चिकनकारी कारीगरों को सहकारी समूह से जोड़ा

लखनऊ: महज 16 वर्षीय प्रणव मित्तल ने लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी कला से जुड़े 30 से अधिक कारीगरों को एक सहकारी समूह (कोऑपरेटिव) के तहत संगठित कर एक सराहनीय पहल शुरू की है। इस प्रयास का उद्देश्य कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदेश की ऐतिहासिक चिकनकारी विरासत को संरक्षित करना है।

यह सहकारी समूह कारीगरों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर किए गए विस्तृत प्राथमिक अध्ययन के आधार पर बनाया गया। शोध में सामने आया कि अधिकांश कारीगर कम और अनियमित आय, बिचौलियों पर निर्भरता, वित्तीय जागरूकता की कमी, डिजिटल तकनीकों के सीमित उपयोग और बड़े बाजारों तक पहुंच न होने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए कारीगरों को एक सहकारी ढांचे में जोड़ा गया, ताकि वे सामूहिक रूप से कार्य कर सकें, अपनी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ा सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। यह मॉडल सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा देता है, जिससे कारीगर संसाधनों को साझा कर बड़े व्यावसायिक अवसरों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

इस पहल के तहत कारीगरों को वित्तीय साक्षरता, बजट प्रबंधन, डिजिटल मार्केटिंग, उत्पाद ब्रांडिंग, मूल्य निर्धारण और ई-कॉमर्स जैसे विषयों पर नियमित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य कारीगरों को सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में सक्षम बनाना है।

सहकारी समूह अपने सदस्यों को विभिन्न प्रदर्शनियों और स्थानीय हस्तशिल्प मेलों में भाग लेने का अवसर भी उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें नए ग्राहक मिलते हैं और बिक्री बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रणव मित्तल का कहना है कि यह पहल केवल कारीगरों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ की सदियों पुरानी चिकनकारी परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का भी प्रयास है। उनका मानना है कि पारंपरिक शिल्प और आधुनिक उद्यमिता का समन्वय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास का भी प्रभावी माध्यम बन सकता है

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