भाई-बहन के प्रेम और पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के बीच ग्रहण की दृश्यता, सूतक काल और धार्मिक नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, खगोलीय गणनाओं के मुताबिक 28 अगस्त 2026 का आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के दौरान भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। ऐसे में देश में रहने वाले लोग इस खगोलीय घटना को सीधे नहीं देख पाएंगे।
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय
दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह समाप्त होने की जानकारी दी गई है।
वहीं, भारत के स्थानीय समय के अनुसार ग्रहण की पेनुम्ब्रल फेज सुबह करीब 6:53 बजे शुरू होने और पूरी खगोलीय घटना दोपहर करीब 12:32 बजे समाप्त होने की बात कही गई है। हालांकि, भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे होने के कारण ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता है तो वहां सूतक काल की मान्यता को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं। सामान्य धार्मिक मान्यता के मुताबिक, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण के कारण पूजा-पाठ या राखी बांधने पर कोई विशेष रोक नहीं होगी।
हालांकि, सूतक और ग्रहण से जुड़े नियम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
ग्रहण को लेकर क्या हैं धार्मिक मान्यताएं?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है। कुछ परिवारों में ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा है। वहीं, सूतक काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद रखने और पूजा-पाठ से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की मान्यता भी है।
ग्रहण के समय मंत्र जाप को भी शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग अपने इष्ट देव के मंत्र, गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं।
गर्भवती महिलाओं को लेकर क्या मान्यता है?
ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं में गर्भवती महिलाओं के लिए भी कुछ सावधानियां बताई जाती हैं। कई परिवारों में उन्हें घर के अंदर रहने और पारंपरिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक या चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता की स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
रक्षाबंधन पर नहीं पड़ेगा ग्रहण का खास असर
कुल मिलाकर, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन और आंशिक चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ेंगे, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण सामान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसलिए देश में रक्षाबंधन का पर्व सामान्य तरीके से मनाया जा सकेगा। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, भाई-बहन सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे के बीच शुभ समय में राखी बांध सकते हैं।
