उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 से 2017 के बीच कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार उस दौरान प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे। औसतन हर दिन 19 दंगे और 33 अपहरण की घटनाएं सामने आती थीं।
उस समय प्रदेश में दंगा, अपहरण और फिरौती जैसे अपराध आम चर्चा का विषय बने हुए थे। व्यापारियों और आम लोगों के बीच भय का माहौल था। लेकिन वर्ष 2017 के बाद सरकार बदलने के साथ ही कानून व्यवस्था को लेकर सख्त नीति अपनाई गई।
योगी सरकार का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान, माफिया नेटवर्क पर कार्रवाई और पुलिसिंग सिस्टम को मजबूत करने के कारण प्रदेश में अपराध दर में बड़ी गिरावट आई है। सरकार इसे ‘सुरक्षित उत्तर प्रदेश’ मॉडल के रूप में पेश कर रही है।
प्रदेश सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था में सुधार केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेश, व्यापार और आम लोगों के विश्वास को भी मजबूती मिली है।
