30 जुलाई से श्रावण (सावन) मास की शुरुआत हो रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में नवग्रहों से संबंधित दोष हैं, तो सावन में विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से उनके प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जा सकता है।
ज्योतिष में अलग अलग ग्रहों को अच्छा करने के उपाय कुछ इस प्रकार है
अलग-अलग ग्रहों के दोषों के लिए जलाभिषेक में विशेष वस्तुओं का उपयोग करने की परंपरा बताई गई है।
ग्रहों के अनुसार अभिषेक के उपाय
सूर्य दोष:गंगाजल या पवित्र जल में श्वेतार्क (आक/मदार) के पत्तों का लेप मिलाकर अभिषेक करें।
चंद्र दोष: काले तिल पीसकर गंगाजल में मिलाएं और शिवलिंग का अभिषेक करें।
मंगल दोष: गिलोय (अमृता) का रस पवित्र जल में मिलाकर अभिषेक करें।
बुध दोष: विधारा के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने की सलाह दी जाती है।
गुरु दोष: गाय के दूध में हल्दी मिलाकर अभिषेक करना शुभ माना जाता है।
शुक्र दोष: गाय के दूध से बनी छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।
शनि दोष: शमी के पत्तों को पीसकर गंगाजल में मिलाकर अभिषेक करें।
राहु दोष: दूर्वा को गंगाजल में मिलाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
केतु दोष: कुश की जड़ को पीसकर पवित्र जल में मिलाकर अभिषेक करना लाभकारी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, सावन में श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने तथा जलाभिषेक करने सेमानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और ग्रहों के अशुभ प्रभावों में कमी आने की मान्यता है। हालांकि, यह उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
