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SGPGI में 3 साल के बच्चे का दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से सफल इलाज, सीरियल प्लाज्मा एक्सचेंज बना सहारा

न्यूज़ डेस्क, लखनऊ 

लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई के चिकित्सकों ने दुर्लभ और गंभीर आनुवंशिक बीमारी होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HoFH) से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे का सफल उपचार किया है। इस बीमारी में जन्म से ही शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहद बढ़ जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर हृदय संबंधी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में जांच के दौरान बच्चे में इस बीमारी की पुष्टि हुई। दवाओं की अधिक मात्रा दिए जाने के बावजूद उसका कोलेस्ट्रॉल स्तर 854 मिलीग्राम/डीएल बना रहा। कम उम्र और महंगे वैकल्पिक उपचारों को देखते हुए बच्चे को ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में अफेरेसिस उपचार के लिए भेजा गया।

टीम ने बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार विशेष पीडियाट्रिक थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया। इसके तहत बच्चे के रक्त से कोलेस्ट्रॉल युक्त प्लाज्मा को अलग कर निकाला गया और उसकी जगह उपयुक्त प्रतिस्थापन द्रव दिया गया।

बच्चे का 20 सप्ताह तक हर सप्ताह ओपीडी आधार पर प्लाज्मा एक्सचेंज किया गया। प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्रॉल स्तर में औसतन करीब 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बच्चे ने सभी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह सहन किया और कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई। त्वचा पर दिखाई देने वाले कोलेस्ट्रॉल जमाव में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई।

डॉ. भरत सिंह के अनुसार, यह भारत में HoFH से पीड़ित सबसे कम उम्र में लगातार प्लाज्मा एक्सचेंज से उपचार पाने वाले रिपोर्टेड बच्चों में से एक है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि दुर्लभ और जटिल बाल रोगों के उपचार में SGPGI की उन्नत थेराप्यूटिक अफेरेसिस सेवाओं को दर्शाती है।

उपचार का समन्वय ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की डॉ. अमिता मोइरांगथेम ने किया। टीम में प्रो. प्रीति एल्हेंस, प्रो. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ का भी योगदान रहा।

SGPGI निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के

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