Homeउत्तर प्रदेशSGPGI में SMA के इलाज की नई पहल, ‘मेक इन इंडिया’ RNA...

SGPGI में SMA के इलाज की नई पहल, ‘मेक इन इंडिया’ RNA स्प्लिसिंग मॉडिफायर थेरेपी शुरू

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए ‘मेक इन इंडिया’ ओरल RNA स्प्लिसिंग मॉडिफायर थेरेपी की शुरुआत की गई है। नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज (NPRD) के तहत संस्थान के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में भारत में निर्मित रिस्डिप्लम दवा NATSMART का पहला बैच 15 बच्चों को निशुल्क उपलब्ध कराया गया।

SMA एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन प्रभावित होते हैं। इससे बच्चों की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। प्रभावित बच्चों में शरीर में ढीलापन, मोटर डेवलपमेंट में देरी, स्कोलियोसिस तथा सांस लेने और बोलने में कठिनाई जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, इन बच्चों की बौद्धिक क्षमता सामान्य रहती है।

विदेशी दवाओं की तुलना में बेहद कम लागत

SMA के इलाज के लिए पहले उपलब्ध कई उपचार विदेशों में निर्मित होने के कारण बेहद महंगे थे। जानकारी के मुताबिक, जीन थेरेपी का खर्च करीब 18 करोड़ रुपये तक और इंट्राथेकल इंजेक्शन की लागत करीब 6 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचती थी। वहीं, विदेशी कंपनी की ओरल RNA स्प्लिसिंग मॉडिफायर दवा की कीमत 20 किलो वजन वाले बच्चे के लिए करीब 1 से 2 करोड़ रुपये सालाना बताई गई है।

भारत में निर्मित दवा की लागत करीब 3.5 लाख रुपये सालाना बताई गई है, जिससे SMA के उपचार को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ी उम्मीद जगी है।

100 से ज्यादा बच्चे पंजीकृत

SGPGI ने नेशनल रेयर डिजीज पॉलिसी के तहत नैटको फार्मा की ओरल RNA स्प्लिसिंग मॉडिफायर दवा रिस्डिप्लम हासिल की है, जिसे NATSMART ब्रांड नाम से उपलब्ध कराया गया है। संस्थान में SMA से पीड़ित 100 से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि 50 से ज्यादा बच्चे दवा मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इस अवसर पर SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमन ने मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने बच्चों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए उत्साहवर्धक संदेश दिया और बच्चों को दवा वितरित की।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने निदेशक डॉ. धीमन की कलाई पर राखी बांधी और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। मौके पर SGPGI के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता, संयुक्त निदेशक (सामग्री प्रबंधन) प्रकाश सिंह और परचेज ऑफिसर गंगा विष्णु समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद दवा उपलब्ध कराने में JDMM कार्यालय के योगदान की भी सराहना की गई।

मेडिकल जेनेटिक्स टीम का अहम योगदान

मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की अगुवाई विभागाध्यक्ष डॉ. कौशिक मंडल कर रहे हैं। दवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में डॉ. दीप्ति सक्सेना, डॉ. अमिता एम, डॉ. हसीना ए सैत, डॉ. अंशिका श्रीवास्तव, डॉ. प्रज्ञा काफ्ले, डॉ. पूजा मोटवानी और डॉ. आदर्श शामिल हैं। इसके अलावा श्रीमती अंजू लता गुप्ता, छह रेजिडेंट डॉक्टरों और वार्ड स्टाफ की टीम भी उपचार व्यवस्था में सहयोग कर रही है।

इस पहल को दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। SGPGI का मेडिकल जेनेटिक्स विभाग देश में अपनी तरह के शुरुआती विशेषीकृत विभागों में शामिल है और अब कई प्रकार की आनुवंशिक बीमारियों के उपचार और प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहा है।

RELATED ARTICLES

Most Popular