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अब पेयजल में माइक्रोप्लास्टिक और PFAS की भी होगी जांच, नई स्टेट लैब तैयार कर रही योगी सरकार

न्यूज डेस्क,लखनऊ

ग्रामीण क्षेत्रों के पेयजल की गुणवत्ता जांच अब और बेहतर होगी। योगी सरकार पानी में माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे नए तरह के प्रदूषकों की जांच की सुविधा विकसित करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की ओर से नई स्टेट लैबोरेटरी का निर्माण कराया जा रहा है। इसे आधुनिक और विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

नई स्टेट लैब में पेयजल की सामान्य जांच के साथ-साथ माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे उभरते प्रदूषकों की पहचान और जांच की क्षमता विकसित करने की योजना है। इन जांचों के लिए जरूरी आधुनिक उपकरणों को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किया गया है।

केंद्रीय सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया निरीक्षण

हाल ही में प्रदेश के दौरे पर आए भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैब का निरीक्षण किया था। इस दौरान जल गुणवत्ता की जांच, उपलब्ध उपकरणों और भविष्य में विकसित की जाने वाली नई परीक्षण सुविधाओं पर चर्चा हुई।

उन्होंने माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा राज्य स्तर पर विकसित करने पर भी जोर दिया।

प्रदेश में 138 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए प्रदेश में व्यापक प्रयोगशाला नेटवर्क है। इसमें 1 स्टेट, 3 क्षेत्रीय, 72 जिला और 62 वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

स्टेट लैब में उन्नत स्तर की जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं और इसके 50 मानक NABL से प्रमाणित हैं। जल जीवन मिशन के तहत इन प्रयोगशालाओं के जरिए पेयजल की नियमित जांच और निगरानी की जाती है।

माइक्रोप्लास्टिक और PFAS क्या हैं?

माइक्रोप्लास्टिक और PFAS एक ही तरह के प्रदूषक नहीं हैं। माइक्रोप्लास्टिक आमतौर पर 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण होते हैं। वहीं PFAS फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का एक बड़ा समूह है। पर्यावरण में लंबे समय तक बने रहने के कारण इन्हें अक्सर ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है।

इन दोनों की जांच के लिए अलग-अलग तकनीक और उपकरणों की जरूरत होती है।

नई लैब से भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद

नई स्टेट लैब के जरिए माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे प्रदूषकों की जांच की क्षमता विकसित होने से प्रदेश में पानी की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी। इससे संभावित प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, बेसलाइन डेटा तैयार करने और भविष्य में बनने वाले मानकों के अनुसार जांच व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। इसे आधुनिक परीक्षण सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक और PFAS जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण होगी।

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