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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को, रात 11:57 से 12:43 बजे तक जन्म पूजा का शुभ मुहूर्त

लखनऊ। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इसे भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव बताया जा रहा है।

द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति के दौरान हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर प्रत्येक वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पर बनेंगे विशेष नक्षत्र और योग

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 4 सितंबर को सुबह से रात 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं हर्षण योग दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा और इसके बाद वज्र योग आरंभ होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा।

इस तरह भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पूजा के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग रहेगा। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय विशेष महत्वपूर्ण माना गया है।

रात 11:57 से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ समय

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा के लिए रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इसी अवधि में श्रद्धालु बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

व्रत से सुख-समृद्धि और मोक्ष की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने से ऐश्वर्य और मुक्ति की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को मनोकामना, आयु, कीर्ति, यश और लाभ की प्राप्ति होने की मान्यता है। इसी जन्म में विभिन्न प्रकार के सुखों का अनुभव करने के बाद मोक्ष प्राप्त होने की भी धार्मिक मान्यता है। इसके अलावा जन्माष्टमी पर व्रत रखने और लड्डू गोपाल की सेवा करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता भी है।

ऐसे मनाया जाता है जन्माष्टमी का पर्व

जन्माष्टमी पर भक्त अपने घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करते हैं। इसके बाद झांकी सजाकर भगवान को झूला, पालना, बांसुरी, मोर पंख और फूलों से सजाया जाता है।

रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद श्रद्धालु बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री, धनिये की पंजीरी और मखाने की खीर का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद भगवान की आरती की जाती है।

कई श्रद्धालु मध्यरात्रि में ही व्रत का पारण कर लेते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन सुबह व्रत खोलते हैं। – ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र, अलीगंज, लखनऊ

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